हाथी शावक की मौत के बाद ग्रामीणों ने कराया पूजा-पाठ व मृत्युभोज, वन विभाग के अधिकारी हुए शामिल

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          रायगढ़ (AkhandBharatHNKP.Com)। रायगढ़ जिले के वन परिक्षेत्र बंगुरसिया सर्किल में हाथी शावक की डूबने से मौत के बाद ग्रामीणों ने तालाब का शुद्धिकरण कर दशकर्म कार्यक्रम और मृत्युभोज का आयोजन किया तथा शावक की आत्मा की शांति के लिए पूजा-अर्चना की।

          हाथी शावकग्रामीणों ने बताया कि शावक की मृत्यु के बाद हाथियों का एक दल कई दिनों तक क्षेत्र में डेरा डाले रहा और आसपास विचरण करता रहा। हाथियों की लगातार चिंघाड़ सुनकर ग्रामीणों को उनके दु:ख का अहसास हुआ। इसी संवेदना के चलते बंगुरसिया और नवापारा गांव के ग्रामीणों ने एकजुट होकर हाथियों के इस दु:ख में सहभागी बनने और मृत शावक की आत्मा की शांति के लिए धार्मिक अनुष्ठान करने का निर्णय लिया।

          हाथी शावक

          ग्रामीणों ने बताया कि शुद्धिकरण और दशकर्म पूजा का उद्देश्य केवल शावक की आत्मा की शांति ही नहीं, बल्कि वन एवं वन्यप्राणियों की सुरक्षा और क्षेत्र में शांति बनाए रखना भी था। जिस स्थान पर शावक की मृत्यु हुई, वहीं मृत्युभोज का आयोजन किया गया। इस दौरान वन विभाग के अधिकारी और कर्मचारी भी मौजूद रहे।

          वन्यजीव संरक्षण के संकल्प के साथ आयोजन

          हाथियों की मौजूदगी के कारण धान मंडी में रखी धान की बोरियों को नुकसान भी हो रहा था। इसे देखते हुए ग्रामीणों ने बैठक कर यह निर्णय लिया कि जनहानि से बचाव और वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए पूजा-पाठ और मृत्युभोज का आयोजन किया जाए। रविवार को बड़ी संख्या में ग्रामीण भजन-कीर्तन करते हुए घटनास्थल पहुंचे। इसके बाद बैगा द्वारा पूजा-अर्चना की गई और सभी ने मृत्युभोज में भाग लिया। कार्यक्रम में बंगुरसिया पूर्व की फॉरेस्टर प्रेमा तिर्की, परिसर रक्षक विजय ठाकुर, बंगुरसिया पश्चिम की आरएफओ ज्योति ध्रुव सहित अन्य अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहे।

          ग्रामीणों ने आपसी सहयोग से जुटाई राशि

          शावक के दशकर्म कार्यक्रम के लिए ग्रामीणों ने आपसी सहयोग से धनराशि एकत्र की। इसके लिए पहले बैठक आयोजित की गई, जिसमें निर्णय लिया गया कि गांव के प्रत्येक घर से स्वेच्छा से अनुदान लिया जाएगा। इसके पश्चात शिव-गणेश मंदिर में भजन-कीर्तन किया गया और मृत्युभोज के रूप में भोजन ग्रहण किया गया।

          ये है पूरा पूरा मामला

          दरअसल, 19 दिसंबर 2025 की रात रायगढ़ वन परिक्षेत्र के बंगुरसिया सर्किल स्थित बड़झरिया तालाब में 32 हाथियों का एक दल नहाने पहुंचा था। इसी दौरान एक शावक गहरे पानी में चला गया और डूबने से उसकी मौत हो गई। रात करीब 10 से 11 बजे हाथियों की चिंघाड़ सुनाई दी। वन विभाग के कर्मचारियों ने देखा कि बड़े हाथी शावक को पैरों से उठाने का प्रयास कर रहे थे। शावक की मौत के बावजूद हाथियों का झुंड कई दिनों तक आसपास के जंगल में ही डटा रहा, जिसने पूरे क्षेत्र को भावनात्मक रूप से झकझोर दिया।

          तालाब में डूबकर बेबी एलीफेंट की मौत

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