बिलासपुर (AkhandBharatHNKP.Com)। अरपा-भैंसाझार परियोजना के तहत भू-अर्जन में करोड़ों रुपये की अनियमितताओं के मामले में प्रशासनिक कार्रवाई का दायरा अब और बढ़ गया है। तत्कालीन तखतपुर एसडीएम आनंद रूप तिवारी के निलंबन के लगभग एक महीने बाद जल संसाधन विभाग के तत्कालीन एसडीओ एसएल द्विवेदी और उप अभियंता (सब इंजीनियर) आरके राजपूत को भी निलंबित कर दिया गया है। यह कार्रवाई पूर्व में कराई गई प्रशासनिक जांच रिपोर्ट के आधार पर की गई है, जिसमें दोनों अधिकारियों को दोषी पाया गया था। यह जल संसाधन विभाग के अधिकारियों पर हुई पहली बड़ी कार्रवाई मानी जा रही है।
अरपा-भैंसाझार परियोजना के अंतर्गत चकरभाठा वितरक नहर निर्माण के लिए भू-अर्जन की प्रक्रिया चल रही थी। जांच में सामने आया कि एक ही खसरे को अलग-अलग रकबा दिखाकर मुआवजा वितरण में 3 करोड़ 42 लाख 17 हजार 920 रुपये की अनियमितता की गई। आरोप है कि मुआवजा वितरण की आड़ में शासन को भारी आर्थिक क्षति पहुंचाई गई। प्रारंभिक जांच तत्कालीन कलेक्टर सौरभ कुमार द्वारा गठित टीम ने की थी। टीम ने 24 फरवरी 2023 को शासन को रिपोर्ट सौंपते हुए स्पष्ट किया था कि भू-अर्जन प्रक्रिया में नियमों की अनदेखी की गई और इसमें जल संसाधन विभाग के अधिकारी भी जिम्मेदार हैं। उस समय संबंधित इंजीनियरों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई। बाद में कलेक्टर अवनीश शरण के पदभार ग्रहण करने के बाद मामले की पुन: जांच कराई गई। इसके आधार पर पटवारी मुकेश साहू (अधिग्रहण के समय पटवारी) को बर्खास्त कर सकरी थाने में अपराध दर्ज कराया गया। इसके साथ ही तत्कालीन एसडीएम आनंद रूप तिवारी को भी निलंबित किया गया था।
नहर का एलाइनमेंट बदलने का आरोप
जांच रिपोर्ट में यह भी उल्लेख है कि निजी व्यक्तियों को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से नहर का एलाइनमेंट बदला गया, जिससे मुआवजा राशि में हेरफेर संभव हुआ। अब जल संसाधन विभाग द्वारा जारी आदेश के अनुसार, तत्कालीन एसडीओ एसएल द्विवेदी और उप अभियंता आरके राजपूत को छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) नियम 1965 के नियम-3 के तहत निलंबित कर दिया गया है। मामले में आगे की विभागीय कार्रवाई और आपराधिक जांच जारी है।

