इच्छामृत्यु पाने वाले हरीश राणा का हुआ अंतिम संस्कार, 13 साल से थे कोमा में, अंगदान से 6 लोगों को मिलेगी नई जिंदगी

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      नई दिल्ली/गाजियाबाद (एजेंसी)। इच्छामृत्यु प्राप्त करने वाले गाजियाबाद निवासी हरीश राणा का बुधवार सुबह अंतिम संस्कार कर दिया गया। ग्रीन पार्क श्मशान घाट में सुबह करीब 9:40 बजे उनके छोटे भाई आशीष राणा ने मुखाग्नि दी। इस दौरान पिता अशोक राणा (62) ने बेटे को अंतिम प्रणाम करते हुए भावुक अपील की कि कोई शोक व्यक्त न करे, ताकि उनका पुत्र शांति से विदा हो सके।

          इच्छामृत्यु

          31 वर्षीय हरीश राणा ने 24 मार्च को अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान में अंतिम सांस ली। वे पिछले 13 वर्षों से कोमा में थे। चिकित्सकों के अनुसार, परिवार ने उनके फेफड़े, दोनों किडनी और कॉर्निया दान किए हैं, जिससे छह लोगों को नया जीवन मिलने की संभावना है। हरीश को पैसिव यूथेनेशिया (इच्छामृत्यु) दी गई थी, जिसमें गंभीर रूप से बीमार मरीज को जीवित रखने वाले कृत्रिम लाइफ सपोर्ट को हटा लिया जाता है, ताकि प्राकृतिक मृत्यु हो सके। सुप्रीम कोर्ट ने 11 मार्च को इस संबंध में अनुमति प्रदान की थी। इसके बाद 14 मार्च को उन्हें गाजियाबाद स्थित निवास से एम्स में भर्ती कराया गया और 16 मार्च को उनकी फीडिंग ट्यूब हटा दी गई थी। गौरतलब है कि यह देश का पहला मामला माना जा रहा है, जिसमें न्यायालय की अनुमति से किसी मरीज को इच्छामृत्यु दी गई है।

          2013 की दुर्घटना के बाद से थे कोमा में

          दिल्ली में जन्मे हरीश राणा पंजाब यूनिवर्सिटी से बीटेक की पढ़ाई कर रहे थे। वर्ष 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के कारण उन्हें गंभीर चोटें आईं, जिससे वे कोमा में चले गए। चिकित्सकों ने उन्हें क्वाड्रिप्लेजिया से ग्रस्त बताया था। इस स्थिति में वे पूरी तरह वेंटिलेटर और फीडिंग ट्यूब पर निर्भर थे तथा सुधार की कोई संभावना नहीं थी। लंबे समय तक बिस्तर पर रहने के कारण उनके शरीर में गहरे घाव (बेडसोर्स) हो गए थे और उनकी हालत लगातार बिगड़ती जा रही थी। इस दौरान उपचार, नर्सिंग और देखभाल पर भारी खर्च के चलते परिवार आर्थिक रूप से भी गंभीर संकट में आ गया था। परिवार ने सबसे पहले 3 अप्रैल 2024 को दिल्ली हाईकोर्ट में इच्छामृत्यु की अनुमति के लिए याचिका दायर की थी, जिसे खारिज कर दिया गया था। इसके बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया, जहां से अंतत: उन्हें अनुमति मिल गई।

          सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला : 13 साल से कोमा में मरीज हरीश राणा को मिली इच्छामृत्यु की मंजूरी

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