रायपुर (AkhandBharatHNKP.Com)। छत्तीसगढ़ में धर्म स्वातंत्र्य से संबंधित नया कानून आज से लागू हो गया है। राज्यपाल की मंजूरी के बाद प्रभावी हुए इस कानून में अवैध धर्मांतरण के मामलों में सख्त दंड का प्रावधान किया गया है। बल, प्रलोभन, धोखाधड़ी या गलत जानकारी देकर धर्म परिवर्तन कराने पर अब दोषियों को 7 से 10 वर्ष तक की सजा और न्यूनतम 5 लाख रुपए जुर्माना देना होगा।

कानून के तहत यदि पीडि़त नाबालिग, महिला, अनुसूचित जाति, जनजाति या अन्य पिछड़ा वर्ग से संबंधित है, तो सजा बढ़ाकर 10 से 20 वर्ष तक की जा सकती है, साथ ही कम से कम 10 लाख रुपए जुर्माने का प्रावधान किया गया है। वहीं सामूहिक धर्मांतरण के मामलों में 10 वर्ष से लेकर आजीवन कारावास और न्यूनतम 25 लाख रुपए जुर्माना तय किया गया है। पुनरावृत्ति की स्थिति में सीधे आजीवन कारावास का प्रावधान रखा गया है। नए नियमों के अनुसार, धर्म परिवर्तन से पहले संबंधित व्यक्ति को 60 दिन पूर्व जिला कलेक्टर को आवेदन देना अनिवार्य होगा। साथ ही अनुष्ठान कराने वाले पुजारी, मौलवी या पादरी को भी इसकी पूर्व सूचना देनी होगी। नियमों का उल्लंघन होने पर इसे अवैध धर्मांतरण माना जाएगा और तत्काल गिरफ्तारी की कार्रवाई की जा सकेगी।
धर्म परिवर्तन के उद्देश्य से की गई शादी शून्य
कानून में कथित लव जिहाद जैसे मामलों पर रोक लगाने के लिए भी प्रावधान शामिल किए गए हैं। धर्म परिवर्तन के उद्देश्य से की गई शादी को शून्य घोषित किया जा सकेगा। इसके अलावा विदेशी फंडिंग और संस्थाओं की भूमिका पर भी सख्ती बरतते हुए ऐसे मामलों में शामिल संगठनों का पंजीयन रद्द करने और भारी जुर्माना लगाने का प्रावधान किया गया है।
विशेष अदालतों में होगी सुनवाई
विधेयक के तहत प्रत्येक जिले में विशेष अदालतों का गठन किया जाएगा, जहां ऐसे मामलों की सुनवाई होगी। सरकार ने मामलों के निपटारे के लिए 6 माह की समयसीमा तय करने का लक्ष्य रखा है। सरकार का दावा है कि इससे कानून-व्यवस्था मजबूत होगी और संवेदनशील क्षेत्रों में तनाव कम होगा, जबकि विपक्ष ने इस कानून का विरोध जताया है।
आदिवासी क्षेत्रों में विवाद के बीच आया कानून
प्रदेश के आदिवासी बहुल क्षेत्रों विशेषकर बस्तर, जशपुर और रायगढ़ में धर्मांतरण को लेकर लंबे समय से विवाद की स्थिति बनी हुई है। नारायणपुर क्षेत्र में यह मुद्दा कई बार टकराव का रूप ले चुका है। सरकार का कहना है कि ऐसे विवादों पर नियंत्रण और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के उद्देश्य से यह कानून लाया गया है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, छत्तीसगढ़ की जनसंख्या 3 करोड़ से अधिक है, जिसमें हिंदू, मुस्लिम, ईसाई और सिख समुदाय शामिल हैं। राज्य में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) की आबादी सर्वाधिक मानी जाती है।
प्रदेश में चर्चों की संख्या लगभग 900
राज्य में लगभग 727 बड़े चर्च हैं, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों के छोटे चर्चों को मिलाकर इनकी संख्या 900 से अधिक बताई जाती है। विश्रामपुर स्थित सिटी ऑफ रेस्ट चर्च (1868) राज्य का सबसे पुराना चर्च माना जाता है, जबकि जशपुर जिले के कुनकुरी में एशिया का दूसरा सबसे बड़ा रोमन कैथोलिक कैथेड्रल स्थित है, जहां देश-विदेश से श्रद्धालु पहुंचते हैं।
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