रायपुर (AkhandBharatHNKP.Com)। छत्तीसगढ़ प्रदेश संयुक्त शिक्षक संघ के कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष ओमप्रकाश बघेल ने कहा है कि प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक शिक्षकों की पदोन्नति में टीईटी तथा व्याख्याता पद के लिए बीएड की अनिवार्यता से शिक्षा व्यवस्था में गुणवत्ता सुनिश्चित होगी, लेकिन इसके साथ फर्जी प्रमाणपत्रों के जरिए पदोन्नति लेने की आशंका भी बढ़ी है।
उन्होंने कहा कि शिक्षा का अधिकार अधिनियम-2009 की धारा 23 के तहत शिक्षकों की न्यूनतम योग्यता तय करने का अधिकार राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (एनसीटीई) को प्राप्त है। इसी क्रम में 23 अगस्त 2010 की अधिसूचना में कक्षा 1 से 8 तक शिक्षक नियुक्ति एवं सेवा निरंतरता के लिए टीईटी उत्तीर्ण होना आवश्यक किया गया है। ओमप्रकाश बघेल ने कहा कि माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने 1 सितंबर 2025 को दिए गए निर्णय में स्पष्ट किया है कि जिन शिक्षकों की पर्याप्त सेवा अवधि शेष है, उनके लिए टीईटी उत्तीर्ण करना अनिवार्य होगा। टीईटी उत्तीर्ण नहीं करने वाले शिक्षक पदोन्नति के पात्र नहीं माने जाएंगे। उन्होंने बताया कि इसी प्रकार उच्च न्यायालय बिलासपुर द्वारा डब्ल्यूपीएस क्रमांक 3078/2026 में पारित आदेश में भी वैधानिक प्रावधानों के अनुरूप टीईटी अनुत्तीर्ण शिक्षकों को पदोन्नति नहीं देने की बात स्पष्ट की गई है।
किसी भी प्रकार का फर्जीवाड़ा बर्दाश्त नहीं
बघेल ने कहा कि कुछ लोग वैधानिक प्रक्रिया से बचते हुए फर्जी टीईटी एवं बीएड प्रमाणपत्रों के माध्यम से पदोन्नति पाने का प्रयास कर रहे हैं। ऐसे मामलों में जांच भी चल रही है तथा पात्रता निरस्त करने जैसी कार्रवाई सामने आई है। उन्होंने स्कूल शिक्षा विभाग एवं संबंधित अधिकारियों से अपील की कि व्यक्तिगत हितों से ऊपर उठकर प्रमाणपत्रों की कड़ी जांच, सत्यापन और पारदर्शी प्रक्रिया सुनिश्चित की जाए, ताकि योग्य शिक्षकों के अधिकार सुरक्षित रह सकें। उन्होंने कहा कि शिक्षा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र में किसी भी प्रकार की फर्जीवाड़ा प्रवृत्ति बर्दाश्त नहीं की जानी चाहिए और दोषियों पर कठोर कार्रवाई होनी चाहिए।

