जय माँ गुरू
जिसने मान, बढाई और स्तुति को तिलांजली दे रक्खी है, उसे खाक लपेटने, अपने को तपाने या समाज सम्मान की आवश्यकता नहीं होती । – पूज्य अघोरेश्वर

गुरू उस नाव की पतवार है जो भव सागर के पार उतारते हैं
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