रायपुर।(AkhandBharatHNKP.Com) छत्तीसगढ़ सरकार के स्कूल शिक्षा विभाग ने राज्य के सभी सरकारी स्कूलों के लिए एक बड़ा और महत्वपूर्ण आदेश जारी किया है। नए नियमों के तहत अब प्रदेश के सभी शासकीय विद्यालयों में दिन में तीन अलग-अलग सत्रों में प्रार्थना, राष्ट्रगान और मंत्रों का पाठ अनिवार्य कर दिया गया है। सरकार का मानना है कि इस कदम से छात्रों में नैतिक मूल्यों और सांस्कृतिक चेतना का विकास होगा, जबकि मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने इस फैसले को लेकर सरकार पर तीखा हमला बोला है।
शिक्षा विभाग द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार, स्कूल के शुरू होने से लेकर छुट्टी होने तक का पूरा टाइम-टेबल तय कर दिया गया है, जिसे तीन सत्रों में बांटा गया है:

प्रातःकालीन सत्र (स्कूल की शुरुआत)
विद्यालय शुरू होते ही सुबह की प्रार्थना सभा (Morning Assembly) में एक तय क्रम का पालन करना अनिवार्य होगा। इस दौरान छात्र क्रमशः राष्ट्रगान, राष्ट्रगीत (वंदे मातरम), दीपमंत्र, सरस्वती वंदना, गुरु मंत्र का पाठ करेंगे। इसके साथ ही, विद्यार्थियों को प्रेरित करने के लिए महापुरुषों की जीवनी का वाचन भी कराया जाएगा।
मध्याह्न सत्र (लंच टाइम)
दोपहर में मध्याह्न भोजन (Mid-Day Meal) शुरू होने से ठीक पहले सभी छात्र एक साथ बैठकर सामूहिक रूप से भोजन मंत्र का पाठ करेंगे। इसका उद्देश्य बच्चों में अन्न के प्रति सम्मान और कृतज्ञता का भाव जगाना है।
संध्या सत्र (स्कूल की छुट्टी)
स्कूल की छुट्टी होने के समय शाम के सत्र में सभी छात्र मिलकर छत्तीसगढ़ का राज्यगीत (“अरपा पैरी के धार”), गायत्री मंत्र और शांति मंत्र का सामूहिक वाचन करेंगे। इसके बाद ही छात्र अपने घर के लिए रवाना हो सकेंगे।

बुनियादी मुद्दों से ध्यान भटकाने की कोशिश-कांग्रेस
स्कूल शिक्षा विभाग के इस आदेश पर प्रदेश की सियासत गरमा गई है। कांग्रेस ने इस फैसले का कड़ा विरोध करते हुए आरोप लगाया है कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) सरकार शिक्षा के वास्तविक मुद्दों से ध्यान भटकाने की कोशिश कर रही है।
कांग्रेस प्रवक्ताओं और नेताओं ने सरकार को घेरते हुए कहा:
- “सरकारी स्कूलों को शिशु मंदिर बनाने की कोशिश”: कांग्रेस का आरोप है कि भाजपा सरकार सरकारी स्कूलों को आरएसएस (RSS) के ‘सरस्वती शिशु मंदिर’ की तर्ज पर ढालने की कोशिश कर रही है और स्कूलों का ‘गेरुआकरण’ किया जा रहा है।
- “शिक्षा व्यवस्था चरमराई, मंत्री मंत्रोच्चार में व्यस्त”: विपक्ष का कहना है कि प्रदेश के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की भारी कमी है, स्कूल भवनों की स्थिति जर्जर है और शिक्षा व्यवस्था पूरी तरह चरमरा चुकी है। शिक्षा मंत्री को शिक्षक भर्ती और बुनियादी ढांचे को सुधारने पर होमवर्क करना चाहिए, न कि स्कूलों में मंत्रोच्चार अनिवार्य करने के लिए।
लापरवाही बरतने पर होगी सख्त कार्रवाई
शासन ने इस आदेश को बेहद गंभीरता से लिया है। सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे स्कूलों का औचक निरीक्षण करें और यह सुनिश्चित करें कि इस नियम का कड़ाई से पालन हो रहा है। यदि किसी भी स्कूल में निर्धारित क्रम की अवहेलना या लापरवाही पाई जाती है, तो संबंधित स्कूल प्रबंधन और प्राचार्य के खिलाफ कड़ी प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी।
16 जून से खुलेंगे स्कूल, तिलक लगाकर होगा स्वागत
छत्तीसगढ़ में गर्मी की छुट्टियों के बाद स्कूल 16 जून से ही खुलेंगे। लोक शिक्षण संचालनालय (डीपीआई) ने शुक्रवार को इस संबंध में आदेश जारी किया है। सभी सरकारी और निजी स्कूलों में 16 जून 2026 से पढ़ाई शुरू होगी। आदेश के मुताबिक, प्रदेश में 20 अप्रैल से 15 जून 2026 तक ग्रीष्मकालीन अवकाश घोषित किया गया था। छुट्टियां खत्म होने के बाद नया शैक्षणिक सत्र 2026-27 का नियमित संचालन 16 जून से शुरू किया जाएगा। इससे पहले गर्मी के कारण स्कूल खुलने में देरी की अटकलें लगाई जा रही थी।
स्कूल खुलने के साथ ही एडमिशन फेस्ट होगा। तिलक लगाकर बच्चों का स्वागत किया जाएगा। नए बच्चों के एडमिशन के लिए गांवों-शहरों में मुनादी की जाएगी। पात्र विद्यार्थियों को फ्री किताबें, यूनिफॉर्म और साइकिल बांटी जाएगी। साथ ही ड्रॉपआउट बच्चों को वापस लाने स्पेशल प्लान तैयार किया गया है।

