रायपुर (AkhandBharatHNKP.Com)। महादेव ऑनलाइन सट्टा एप के कथित संचालक सौरभ चंद्राकर की ओमान में गिरफ्तारी के बाद उसके कथित फर्जी इंडोनेशियाई पासपोर्ट का मामला सामने आया है। वायरल दस्तावेज में तस्वीर सौरभ की है, लेकिन नाम श्रीलंका के पूर्व क्रिकेटर अजंता मेंडिस से मिलता-जुलता “Ajanta Mendis” दर्ज है। जांच एजेंसियों को आशंका है कि इसी फर्जी पासपोर्ट के जरिए उसने ओमान में प्रवेश किया और भारत प्रत्यर्पण से बचने की कोशिश की।
पासपोर्ट संख्या E3387986 में जन्मतिथि 11 मार्च 1998 दर्ज है, जबकि जांच में सामने आए वानूआतू के दस्तावेजों में उसकी जन्मतिथि 13 जनवरी 1995 बताई गई है। अलग-अलग दस्तावेजों में अलग पहचान और जन्मतिथि मिलने के बाद एजेंसियां यह जांच कर रही हैं कि क्या यह कानूनी कार्रवाई और प्रत्यर्पण प्रक्रिया से बचने की सुनियोजित रणनीति थी। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) और सीबीआई महादेव ऑनलाइन सट्टा एप से जुड़े हजारों करोड़ रुपये के कथित मनी लॉन्ड्रिंग और अवैध वित्तीय लेन-देन की जांच कर रही हैं। हाल ही में इंटरपोल की कमिशन फॉर द कंट्रोल ऑफ इंटरपोल्स फाइल्स (CCF) ने सौरभ चंद्राकर की रेड नोटिस हटाने की याचिका खारिज कर दी। आयोग ने स्पष्ट किया कि मामला राजनीतिक नहीं, बल्कि वित्तीय अपराध और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ा है।
ओमान में पहले चलेगी कानूनी प्रक्रिया
अधिकारियों के अनुसार, ओमान के कानून में फर्जी पासपोर्ट का इस्तेमाल गंभीर अपराध है। ऐसे मामलों में 3 से 5 वर्ष तक की सजा और जुर्माने का प्रावधान है। इसलिए पहले ओमान में फर्जी दस्तावेज के मामले की कानूनी प्रक्रिया पूरी होगी, इसके बाद भारत के प्रत्यर्पण अनुरोध पर निर्णय लिया जाएगा। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि फर्जी पासपोर्ट किस नेटवर्क के माध्यम से तैयार कराया गया और इसका इस्तेमाल किन-किन देशों की यात्रा के लिए किया गया।
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