बिलासपुर (AkhandBharatHNKP.Com)। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि राज्य में जाति प्रमाण-पत्र जारी करने का अधिकार तहसीलदार के पास नहीं, बल्कि अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) यानी एसडीएम के पास है। न्यायालय ने याचिकाकर्ता को आवश्यक दस्तावेजों के साथ सक्षम प्राधिकारी के समक्ष नया आवेदन प्रस्तुत करने की अनुमति देते हुए नियमानुसार शीघ्र निर्णय लेने के निर्देश दिए हैं।
मामले की सुनवाई जस्टिस पी.पी. साहू की एकलपीठ में हुई। बिलासपुर के राजकिशोर नगर निवासी शैली सोनकर ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर जाति प्रमाण-पत्र जारी करने के निर्देश देने की मांग की थी। सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से बताया गया कि छत्तीसगढ़ अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति एवं अन्य पिछड़ा वर्ग (सामाजिक स्थिति के प्रमाणीकरण का विनियमन) अधिनियम, 2013 तथा 24 सितंबर 2013 के शासन के परिपत्र के अनुसार जाति प्रमाण-पत्र जारी करने का अधिकार केवल अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) को है। साथ ही यह भी कहा गया कि याचिकाकर्ता ने सक्षम अधिकारी के समक्ष आवेदन करने संबंधी कोई दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किया।
तहसीलदार को दिया था आवेदन
याचिकाकर्ता की ओर से अदालत को बताया गया कि उन्होंने जाति प्रमाण-पत्र के लिए तहसीलदार, बिलासपुर के समक्ष आवेदन किया था। तहसीलदार ने आवेदन पर प्रकरण दर्ज कर प्रक्रिया भी शुरू की, लेकिन लंबे समय तक प्रमाण-पत्र जारी नहीं किया गया।
30 दिन में नया आवेदन करने की छूट
मामले में हाईकोर्ट ने कहा कि चूंकि तहसीलदार इस मामले में सक्षम प्राधिकारी नहीं हैं, इसलिए याचिकाकर्ता 30 दिनों के भीतर सभी आवश्यक दस्तावेजों के साथ संबंधित एसडीएम के समक्ष नया आवेदन प्रस्तुत कर सकती हैं। अदालत ने सक्षम अधिकारी को निर्देश दिया है कि आवेदन प्राप्त होने के बाद नियमों के अनुरूप जल्द से जल्द उस पर निर्णय लिया जाए।
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