बालको के सामुदायिक विकास कार्यों से गांवों में दिख रहा बदलाव, 1.80 लाख लोगों तक पहुंची पहल

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      • खेती से लेकर महिला स्वावलंबन, कौशल विकास, शिक्षा और स्वास्थ्य तक व्यापक स्तर पर किए जा रहे कार्य

      बालकोनगर (AkhandBharatHNKP.Com)।  जब किसी गांव का किसान बारिश पर निर्भर रहने के बजाय सिंचाई की सुविधा से साल में दूसरी और तीसरी फसल लेने लगे, किसी महिला का हुनर उसके परिवार की आमदनी बढ़ाने लगे, युवाओं को प्रशिक्षण के बाद रोजगार मिलने लगे और बच्चों को आंगनबाड़ी में बेहतर शिक्षा, पोषण व स्वास्थ्य सुविधाएं मिलने लगें, तो विकास केवल आंकड़ों तक सीमित नहीं रहता। वह लोगों के जीवन में दिखाई देने वाला बदलाव बन जाता है।

          बालको

          भारत एल्यूमिनियम कंपनी लिमिटेड (बालको) की सामुदायिक विकास पहल भी इसी सोच के साथ आगे बढ़ रही है। कंपनी ने समुदायों के साथ मिलकर लंबे समय तक असर डालने वाले विकास कार्यों पर जोर दिया है। वित्तीय वर्ष 2026 में बालको की विभिन्न पहलों का लाभ 123 गांवों के करीब 1.80 लाख लोगों तक पहुंचा। शिक्षा, स्वास्थ्य, आजीविका, महिला सशक्तिकरण, सामुदायिक सुविधाओं और खेल के माध्यम से लोगों की क्षमताओं को मजबूत करने का प्रयास किया गया। इन पहलों का असर कई स्तरों पर दिखाई दे रहा है। किसान आधुनिक खेती को अपनाने के साथ दूसरे किसानों को भी नई तकनीकों की जानकारी दे रहे हैं। महिलाएं स्वयं सहायता समूहों और छोटे व्यवसायों का संचालन कर रही हैं, जबकि युवा कौशल प्रशिक्षण के जरिए रोजगार के साथ नेतृत्व के अवसर भी हासिल कर रहे हैं। इस तरह सामुदायिक विकास केवल योजनाओं तक सीमित न रहकर आत्मनिर्भरता और स्थायी बदलाव की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

          जीवन के हर चरण को ध्यान में रखकर विकास

          बालको की सामुदायिक विकास रणनीति व्यक्ति के जीवन के अलग-अलग चरणों की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार की गई है। बचपन में पोषण और शिक्षा से लेकर स्कूली शिक्षा, कौशल प्रशिक्षण, रोजगार, आर्थिक आत्मनिर्भरता और सामुदायिक कल्याण तक लगातार विकास पर ध्यान दिया जा रहा है। इसी कड़ी में नंद घरों को आंगनबाड़ी केंद्रों के रूप में आधुनिक और बच्चों के अनुकूल बनाया गया है। वित्तीय वर्ष 2026 में 111 नंद घरों के माध्यम से बच्चों और माताओं को लाभ मिला। वहीं 7,226 विद्यार्थियों को डिजिटल कक्षाओं की सुविधा मिली और 400 से अधिक विद्यार्थी शैक्षणिक व रचनात्मक गतिविधियों से जुड़े। 800 से अधिक आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को प्रशिक्षण दिया गया। चिन्हित कुपोषित बच्चों में 75 प्रतिशत में स्वास्थ्य सुधार दर्ज किया गया। शिक्षा के क्षेत्र में सरकारी स्कूलों में डिजिटल कक्षाओं, कमजोर विद्यार्थियों के लिए अतिरिक्त शिक्षण और सह-पाठ्यक्रम गतिविधियों को बढ़ावा दिया गया। बालको संपर्क कोचिंग कार्यक्रम के तहत प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले युवाओं के लिए कोरबा और कवर्धा में दो कोचिंग केंद्र चलाए गए। वित्तीय वर्ष 2026 में 84 अभ्यर्थियों का सरकारी परीक्षाओं में चयन हुआ।

          आधुनिक खेती से किसानों की बढ़ी आय

          ग्रामीण अर्थव्यवस्था में कृषि की महत्वपूर्ण भूमिका को देखते हुए बालको ने ‘मोर जल मोर माटी’ कार्यक्रम के जरिए जल संरक्षण, आधुनिक खेती और आय के वैकल्पिक साधनों को एक साथ जोड़ने का प्रयास किया है। वित्तीय वर्ष 2026 में यह कार्यक्रम 40 गांवों के 9,420 किसानों तक पहुंचा। 1,400 एकड़ से अधिक कृषि भूमि के लिए सिंचाई सुरक्षा को मजबूत किया गया। जल संरक्षण, सूक्ष्म सिंचाई और लिफ्ट सिंचाई के साथ किसानों को आधुनिक खेती की तकनीक, बेहतर बीज का चयन, मिट्टी की जांच और फसलों में कीट व पोषक तत्वों के उचित प्रबंधन का प्रशिक्षण दिया गया। इसके परिणामस्वरूप 80 प्रतिशत किसानों ने आधुनिक और मौसम के अनुकूल कृषि पद्धतियों को अपनाया। इससे उत्पादन में करीब 1.25 से 1.5 गुना तक बढ़ोतरी हुई। औसत कृषि आय में लगभग 50 प्रतिशत वृद्धि दर्ज की गई, जबकि खेती की लागत में 25 से 30 प्रतिशत तक कमी आई। सिंचाई सुविधा मजबूत होने से 3,000 से अधिक किसानों ने दूसरी और तीसरी फसल लेना शुरू किया। किसानों को पशुपालन, लाख उत्पादन, बागवानी और मत्स्य पालन जैसी गतिविधियों से भी जोड़ा गया, जिससे उनकी आय के अतिरिक्त स्रोत तैयार हुए। इससे खेती को अधिक स्थायी आजीविका के रूप में मजबूत करने में मदद मिली।

          कौशल प्रशिक्षण से युवाओं को रोजगार की राह

          ग्रामीण युवाओं को रोजगार के लिए तैयार करने में वेदांता कौशल विद्यालय की महत्वपूर्ण भूमिका रही। वित्तीय वर्ष 2026 में कोरबा, कवर्धा और सरगुजा के तीन केंद्रों में 1,202 युवाओं को प्रशिक्षण दिया गया। इनमें से 82 प्रतिशत युवाओं को रोजगार या स्वरोजगार से जुड़ने का अवसर मिला। रोजगार से जोड़ने वाली 75 संस्थाओं का नेटवर्क अब 12 राज्यों तक पहुंच चुका है। प्रशिक्षण लेने वालों में 61 प्रतिशत महिलाएं थीं, जबकि 59 प्रतिशत प्रतिभागी अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति समुदायों से थे। तकनीकी प्रशिक्षण के अलावा युवाओं को व्यक्तित्व विकास, कृत्रिम बुद्धिमत्ता तकनीक की जानकारी, औद्योगिक भ्रमण, सुरक्षा प्रशिक्षण, स्वास्थ्य संबंधी जानकारी और विशेषज्ञों से मार्गदर्शन भी दिया गया। इससे युवाओं में कौशल के साथ आत्मविश्वास और कार्यक्षमता बढ़ाने पर जोर दिया गया।

          महिला सशक्तिकरण से आत्मनिर्भरता की ओर

          बालको की सामुदायिक विकास योजनाओं में महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने को विशेष महत्व दिया गया है। ‘उन्नति’ परियोजना के माध्यम से महिलाओं को स्वयं सहायता समूहों, बैंकिंग सुविधाओं और छोटे व्यवसायों से जोड़कर आर्थिक रूप से सक्षम बनाने का प्रयास किया गया। वित्तीय वर्ष 2026 में 40 नए स्वयं सहायता समूह बनाए गए। इसके साथ कुल समूहों की संख्या 561 और उनसे जुड़ी महिलाओं की संख्या 6,003 हो गई। इनमें 2,259 महिलाएं आर्थिक गतिविधियों से सक्रिय रूप से जुड़ी हैं। समूहों की सामूहिक बचत बढ़कर 92 लाख रुपये हो गई। 90 प्रतिशत समूह नियमित बैठकें करने और आपसी ऋण व्यवस्था में सक्रिय रहे। 19 स्वयं सहायता समूहों को बैंकों से जोड़ा गया, जिसके माध्यम से करीब 27 लाख रुपये का ऋण सहयोग मिला। उन्नति महासंघ के सहयोग से उनाटेक्स, डेकोराती, छत्तीसा, क्लिनला, मशरूम उत्पादन और कोसाकारी के तहत कोसा रेशम जैसे कार्यों से 600 से अधिक महिलाएं जुड़ीं। इन गतिविधियों से करीब 20 लाख रुपये का राजस्व अर्जित हुआ। इसके अलावा 21 छोटे व्यवसायों के माध्यम से 104 महिलाओं को रोजगार का अवसर मिला और प्रत्येक महिला को औसतन करीब 3,500 रुपये प्रतिमाह अतिरिक्त आय का अवसर प्राप्त हुआ।

          कोसा रेशम को बाजार से जोड़ने की पहल

          छत्तीसगढ़ की पारंपरिक पहचान को आधुनिक बाजार से जोड़ने के उद्देश्य से वित्तीय वर्ष 2025-26 में कोसाकारी पहल शुरू की गई। धनगांव में कोसा बुनाई प्रशिक्षण केंद्र स्थापित कर 20 महिला बुनकरों को प्रशिक्षण दिया गया। ‘कोसाकारी’ नाम से ब्रांड और डिजिटल मंच की शुरुआत की गई। इससे स्थानीय बुनकरों को बाजार से जोड़ने और उनके उत्पादों को व्यापक पहचान दिलाने का रास्ता तैयार हुआ।

          स्वास्थ्य सुविधाओं को गांवों तक पहुंचाने का प्रयास

          स्वास्थ्य के क्षेत्र में बालको की पहल प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं से लेकर उन्नत कैंसर उपचार तक फैली हुई है। ‘आरोग्य’ परियोजना के माध्यम से वित्तीय वर्ष 2026 में 93,442 लोगों को सामुदायिक स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ मिला। तीन ग्रामीण स्वास्थ्य केंद्रों में 4,799 मरीजों को बाह्य रोगी विभाग की सेवाएं दी गईं। 65 आंगनबाड़ियों में 3,340 बच्चों की स्वास्थ्य जांच की गई। इनमें 915 कुपोषित बच्चों की पहचान हुई और 95 प्रतिशत बच्चों की पोषण स्थिति में सुधार दर्ज किया गया। 2,310 महिलाओं की रक्ताल्पता की जांच की गई, जिनमें 92 प्रतिशत महिलाओं के हीमोग्लोबिन स्तर में सुधार हुआ। दो मोबाइल स्वास्थ्य वाहनों के जरिए 70 बस्तियों में हर पखवाड़े स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाई गईं। इन सेवाओं का करीब 26,500 लोगों ने लाभ लिया। नवा रायपुर स्थित बालको मेडिकल सेंटर ने उन्नत कैंसर उपचार के क्षेत्र में भी योगदान दिया। वित्तीय वर्ष 2025-26 में सामुदायिक विकास सहायता के तहत 17,290 मरीजों ने उपचार सेवाओं का लाभ उठाया। केंद्र में 2,800 शल्य चिकित्सा, 16,891 कीमोथेरेपी और 1,635 रेडियोथेरेपी उपचार किए गए। यहां मध्य भारत की पहली दा विंची एक्सआई रोबोट आधारित कैंसर शल्य चिकित्सा प्रणाली भी स्थापित की गई।

          सामुदायिक सुविधाओं से बेहतर हुआ जीवन

          सामुदायिक विकास का एक महत्वपूर्ण हिस्सा लोगों को बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराना भी है। वित्तीय वर्ष 2026 में बालको ने चार सामुदायिक भवन, 12 सामुदायिक शौचालय और दो सामुदायिक मंच तैयार किए। इन सुविधाओं से 7,500 से अधिक लोगों को लाभ मिला। इनका उपयोग स्वच्छता के साथ-साथ सामाजिक, सांस्कृतिक और सामुदायिक गतिविधियों के लिए भी किया जा रहा है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को सामूहिक कार्यक्रमों के लिए बेहतर स्थान उपलब्ध हुए हैं।

          तीरंदाजी से बच्चों को मिल रहा मंच

          युवाओं और विद्यार्थियों की प्रतिभा को पहचानकर उन्हें आगे बढ़ने का अवसर देने के लिए ‘लक्ष्यवेद-बालको तीरंदाजी’ कार्यक्रम शुरू किया गया। इसके तहत छत्तीसगढ़ की पारंपरिक तीरंदाजी को आधुनिक प्रशिक्षण और प्रतियोगिताओं से जोड़ा गया। 29 स्कूलों में तीरंदाजी प्रशिक्षण सत्र आयोजित किए गए। 1,200 से अधिक विद्यार्थियों की प्रतिभा की जांच की गई, जिसमें से 70 प्रतिभागियों ने चयन परीक्षा में सफलता हासिल की।

          आंकड़ों से ज्यादा महत्वपूर्ण है लोगों के जीवन में बदलाव

          बालको की सामुदायिक विकास पहल के तहत 1.80 लाख लोगों तक पहुंच बनाना निश्चित रूप से एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है, लेकिन इन प्रयासों की वास्तविक सफलता उन बदलावों में दिखाई देती है, जो लोगों के जीवन में नजर आ रहे हैं। किसान का खेती को लेकर बढ़ा आत्मविश्वास, महिलाओं की आर्थिक फैसले लेने की क्षमता, कौशल हासिल कर रोजगार की ओर बढ़ता युवा, बेहतर सीखने का अवसर प्राप्त करता बच्चा और समय पर स्वास्थ्य सुविधाएं मिलने से मजबूत होता परिवार—यही सामुदायिक विकास की वास्तविक तस्वीर है। बालको का प्रयास सामुदायिक विकास को केवल अलग-अलग परियोजनाओं तक सीमित रखने के बजाय इसे लोगों के साथ मिलकर आगे बढ़ने वाली साझी यात्रा बनाना है। उद्देश्य यह है कि समुदाय अपनी क्षमताओं को मजबूत करे और भविष्य की चुनौतियों का सामना स्वयं करने में सक्षम बने। स्थायी विकास तभी संभव है, जब सहयोग आत्मविश्वास में बदले, आत्मविश्वास क्षमता में और क्षमता पूरे समुदाय की ताकत बने। बालको की सामुदायिक विकास पहल इसी सोच के साथ लोगों को प्रेरित करने, सक्षम बनाने और उनके साथ मिलकर बेहतर, समावेशी और आत्मनिर्भर भविष्य की दिशा में आगे बढ़ने पर केंद्रित है।

          आत्मनिर्भर भारत की दिशा में बालको की उड़ान, 1 मिलियन टन क्षमता की ओर बढ़ते कदम, रोजगार और विकास को मिलेगी नई रफ्तार

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