छत्तीसगढ़ की अंतरिक्ष अनुसंधान संस्था ‘आर्कासा’ ने रचा इतिहास, पोलैंड में पूरी की विश्वस्तरीय मानव सेंट्रीफ्यूज प्रशिक्षण

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      • अंतरिक्ष यात्रियों और लड़ाकू विमान चालकों को दिए जाने वाले उच्चस्तरीय प्रशिक्षण में मिली सफलता, वैश्विक मंच पर बढ़ाया छत्तीसगढ़ और देश का गौरव

      महासमुंद (AkhandBharatHNKP.Com)। छत्तीसगढ़ की अंतरिक्ष अनुसंधान संस्था आर्कासा (अंतरिक्ष वास्तुकला एवं अभिकल्प अनुसंधान प्रयोगशाला) ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। रायपुर स्थित इस संस्था ने पोलैंड में आयोजित विश्वस्तरीय मानव सेंट्रीफ्यूज प्रशिक्षण सफलतापूर्वक पूरा कर वैश्विक स्तर पर अपनी अलग पहचान बनाई है। यह वही उच्चस्तरीय सैन्य प्रशिक्षण है, जिसका उपयोग लड़ाकू विमान चालकों और अंतरिक्ष यात्रियों को अत्यधिक गुरुत्वीय बल (जी-फोर्स) की परिस्थितियों के लिए तैयार करने में किया जाता है।

          आर्कासा

          आर्कासा अंतरिक्ष वास्तुकला, अभिकल्प और मानव अंतरिक्ष अन्वेषण के क्षेत्र में कार्य करने वाली एक उभरती हुई अनुसंधान संस्था है। संस्था भविष्य के चंद्र और मंगल अभियानों, मानव-केंद्रित अंतरिक्ष आवासों, अंतरिक्ष यात्रियों के प्रशिक्षण तथा अंतरिक्ष शिक्षा के क्षेत्र में अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा दे रही है। साथ ही भारत की वैश्विक अंतरिक्ष क्षेत्र में भूमिका को मजबूत बनाने की दिशा में भी कार्य कर रही है। आर्कासा भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के स्पेस ट्यूटर कार्यक्रम के अंतर्गत पंजीकृत है तथा भारतीय राष्ट्रीय अंतरिक्ष संवर्धन एवं प्राधिकरण केंद्र (इन-स्पेस) के नवाचार तंत्र का भी हिस्सा है। संस्था युवाओं, शोधार्थियों और विद्यार्थियों को अंतरिक्ष विज्ञान, अंतरिक्ष वास्तुकला और अंतरिक्ष अनुसंधान के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित कर रही है।

          चार सदस्यीय दल ने किया भारत का प्रतिनिधित्व

          पोलैंड में आयोजित इस प्रशिक्षण में संस्था की संस्थापक अर्शलीन कौर साहनी, सह-संस्थापक बिस्वजीत दास तथा टीम सदस्य लुमेश साहू और अनुष्का राठौर ने भाग लिया। यह प्रशिक्षण पोलैंड के एनालॉग अंतरिक्ष यात्री प्रशिक्षण केंद्र और सैन्य विमानन चिकित्सा संस्थान, वारसॉ के संयुक्त सहयोग से आयोजित किया गया।

          अत्यधिक जी-फोर्स में काम करने का मिला प्रशिक्षण

          प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को अत्यधिक गुरुत्वीय बल की परिस्थितियों में मानव शरीर की कार्यप्रणाली, बेहोशी से बचाव की तकनीक, तीव्र त्वरण के दौरान शरीर की प्रतिक्रिया तथा लड़ाकू विमान के कॉकपिट जैसी परिस्थितियों में व्यवहारिक प्रशिक्षण दिया गया। यह प्रशिक्षण मानव अंतरिक्ष उड़ान और अंतरिक्ष मिशनों की तैयारी के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।

          मानव-केंद्रित अंतरिक्ष अनुसंधान को मिलेगी नई दिशा

          संस्था की संस्थापक अर्शलीन कौर साहनी ने कहा कि भविष्य का मानव अंतरिक्ष अन्वेषण केवल उन्नत तकनीक पर ही नहीं, बल्कि कठिन परिस्थितियों में मानव शरीर की क्षमता को समझने पर भी निर्भर करता है। इस प्रशिक्षण से प्राप्त अनुभव भविष्य में अंतरिक्ष वास्तुकला, मानव-केंद्रित अंतरिक्ष आवास और मानव अंतरिक्ष उड़ान से जुड़े अनुसंधानों को नई दिशा देगा।

          छत्तीसगढ़ के लिए गर्व की उपलब्धि

          आर्कासा की यह सफलता केवल संस्था ही नहीं, बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ के लिए गौरव का विषय है। विश्व के प्रतिष्ठित सैन्य-स्तरीय अंतरिक्ष प्रशिक्षण कार्यक्रम में सफल भागीदारी कर संस्था ने यह साबित किया है कि प्रदेश के युवा शोधकर्ता और नवप्रवर्तक भी वैश्विक अंतरिक्ष अनुसंधान और मानव अंतरिक्ष अन्वेषण के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान देने की क्षमता रखते हैं।

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