केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने अमेरिका और पाकिस्तान से आर्थिक मदद मिलने का लगाया था आरोप, अभिजीत दीपके, आशुतोष रांका और सौरव दास के नाम चर्चा में
नई दिल्ली। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) से जुड़े कथित विदेशी फंडिंग के मामले ने अब जांच का रूप ले लिया है। केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह द्वारा संगठन के नेताओं को अमेरिका और पाकिस्तान से आर्थिक सहायता मिलने के आरोप लगाए जाने के बाद दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने पूछताछ शुरू कर दी है। इस सिलसिले में सीजेपी के सह-संस्थापक आशुतोष रांका और सौरव दास को नोटिस जारी कर पूछताछ के लिए बुलाया गया है। दोनों के क्राइम ब्रांच कार्यालय पहुंचने के बाद जांच अधिकारियों ने उनसे संगठन को मिलने वाली आर्थिक सहायता और विभिन्न अभियानों के लिए धन के स्रोतों को लेकर सवाल किए।
केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने बेंगलुरु में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान सीजेपी से जुड़े लोगों पर विदेशी आर्थिक सहायता लेने के आरोप लगाए थे। उन्होंने दावा किया था कि संगठन के संस्थापक अभिजीत दीपके को अमेरिका में मौजूद कुछ दानदाताओं से आर्थिक मदद मिल रही है, जबकि सह-संस्थापक आशुतोष रांका को पाकिस्तान से जुड़े लोगों और कथित संपर्कों के माध्यम से धन उपलब्ध कराया जा रहा है। मंत्री ने आरोप लगाया था कि इस तरह प्राप्त धन का इस्तेमाल भारत में सरकार के खिलाफ माहौल बनाने और विभिन्न अभियानों के संचालन में किया जा रहा है। हालांकि, ये आरोप हैं और इनकी पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
क्राइम ब्रांच खंगाल रही आर्थिक लेनदेन का ब्यौरा
विदेशी फंडिंग से जुड़े आरोप सामने आने के बाद दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने मामले में पूछताछ की प्रक्रिया शुरू की है। आशुतोष रांका और सौरव दास को नोटिस देकर तलब किया गया। जांच के दौरान संगठन को मिलने वाले चंदे, आर्थिक लेनदेन, फंडिंग के स्रोत और विभिन्न गतिविधियों पर खर्च की गई राशि से संबंधित जानकारियां जुटाई जा रही हैं। जांच एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि संगठन को आर्थिक सहायता कहां से मिल रही है और क्या इसमें विदेशी धन से जुड़े नियमों का उल्लंघन हुआ है।
FCRA कानून और विदेशी संगठनों की भूमिका पर भी उठे सवाल
केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने अपने बयान में विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम (एफसीआरए) का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि विदेशी धन के जरिए देश की आंतरिक गतिविधियों को प्रभावित करने की आशंका को रोकने के लिए इस कानून का प्रभावी क्रियान्वयन जरूरी है। उन्होंने विदेशी गैर-सरकारी संगठनों और तथाकथित डीप स्टेट से जुड़े तत्वों की भूमिका की भी जांच की मांग उठाई थी। उनका आरोप है कि कुछ विदेशी ताकतें भारत में प्रदर्शनों और सरकार विरोधी अभियानों को प्रभावित करने के लिए आर्थिक संसाधन उपलब्ध करा सकती हैं।
जांच के बाद स्पष्ट होगी फंडिंग की वास्तविक स्थिति
फिलहाल इस मामले में विदेशी फंडिंग को लेकर लगाए गए आरोपों और पुलिस की पूछताछ पर सबकी नजरें टिकी हुई हैं। जांच में आर्थिक लेनदेन, फंडिंग के स्रोत और संबंधित दस्तावेजों की पड़ताल महत्वपूर्ण होगी। अभी तक उपलब्ध जानकारी के आधार पर विदेशी फंडिंग से जुड़े आरोपों को प्रमाणित तथ्य नहीं माना जा सकता। पुलिस की जांच और आधिकारिक निष्कर्ष सामने आने के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी।
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