निजी स्कूलों की मान्यता नियमों में बड़ा बदलाव, अब अपनी जमीन होना जरूरी नहीं

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      • खेल मैदान, पुस्तकालय और प्रयोगशाला साझा व्यवस्था से चल सकेंगे, प्रदेश के 6800 से अधिक स्कूल होंगे प्रभावित

      रायपुर (AkhandBharatHNKP.Com)। छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल ने निजी स्कूलों की मान्यता प्रक्रिया में बड़ा बदलाव करते हुए नए नियम लागू किए हैं। संशोधित प्रावधानों के तहत अब निजी स्कूलों के लिए स्वयं की जमीन होना अनिवार्य नहीं रहेगा। इसके साथ ही खेल मैदान, पुस्तकालय और विज्ञान प्रयोगशाला जैसी मूलभूत सुविधाएं भी स्कूल परिसर के भीतर होना आवश्यक नहीं होंगी।

          नए नियमों के अनुसार स्कूल संचालक अब इन सुविधाओं की व्यवस्था साझेदारी, किराये अथवा अनुबंध के आधार पर भी कर सकेंगे। शिक्षा क्षेत्र में इस फैसले को निजी स्कूलों के लिए बड़ी राहत के रूप में देखा जा रहा है। छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल के संशोधित नियमों के अनुसार यदि किसी निजी स्कूल के पास स्वयं का खेल मैदान, पुस्तकालय या प्रयोगशाला उपलब्ध नहीं है, तो वह किसी सरकारी संस्थान, नगर निगम अथवा पहले से मान्यता प्राप्त अन्य शिक्षण संस्थानों के साथ समझौता कर इन सुविधाओं का उपयोग कर सकेगा। अब इस व्यवस्था को औपचारिक रूप से मान्यता प्रक्रिया का हिस्सा बना दिया गया है, जिससे नए स्कूलों को संचालन में आसानी होगी।

          केंद्र सरकार की नई नीति के अनुरूप लिया गया निर्णय

          बताया जा रहा है कि यह बदलाव केंद्र सरकार की नई दिशा-निर्देशों और शिक्षा क्षेत्र में उपलब्ध संसाधनों के बेहतर उपयोग की अवधारणा को ध्यान में रखते हुए किया गया है। इसका उद्देश्य सीमित संसाधनों वाले निजी स्कूलों को व्यावहारिक राहत देना तथा नए शिक्षण संस्थानों के विस्तार को प्रोत्साहन प्रदान करना है। प्रदेश में सीजी बोर्ड से संबद्ध  6800 से अधिक निजी स्कूल संचालित हैं। इनमें अकेले रायपुर जिले में 700 से ज्यादा निजी स्कूल शामिल हैं। इनमें बड़ी संख्या ऐसे स्कूलों की है, जहां स्थायी खेल मैदान जैसी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं। ऐसे मामलों को लेकर पहले भी सवाल उठते रहे हैं कि पर्याप्त सुविधाओं के अभाव के बावजूद स्कूलों को मान्यता कैसे दी गई।

          शहरी क्षेत्रों के स्कूलों को मिलेगी राहत

          नया नियम विशेष रूप से शहरी क्षेत्रों में संचालित उन निजी स्कूलों के लिए राहत लेकर आया है, जो सीमित भूमि, बढ़ती लागत और आधारभूत ढांचे की कमी के कारण खेल मैदान या प्रयोगशाला जैसी सुविधाएं विकसित नहीं कर पा रहे थे।अब साझा संसाधन व्यवस्था के तहत ऐसे स्कूल आसानी से मान्यता प्राप्त कर सकेंगे और संचालन जारी रख पाएंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि नए नियम लागू होने के बाद शिक्षा क्षेत्र में नए निजी स्कूलों की स्थापना का रास्ता आसान होगा। साथ ही उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित हो सकेगा। हालांकि इस निर्णय के बाद शिक्षा की गुणवत्ता और छात्रों को मिलने वाली सुविधाओं को लेकर बहस भी तेज होने की संभावना जताई जा रही है।

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