आयुष्मान भारत योजना के तहत मुफ्त इलाज पर संकट, छोटे अस्पतालों में बंद होने का खतरा

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          रायपुर (AkhandBharatHNKP.Com)। छत्तीसगढ़ में आयुष्मान भारत योजना के तहत गरीब और जरूरतमंद मरीजों को मिलने वाले मुफ्त इलाज पर बड़ा संकट मंडरा रहा है। राज्य के 620 निजी अस्पतालों में से करीब 150 से अधिक अस्पतालों में योजना के तहत फ्री इलाज बंद होने का खतरा पैदा हो गया है।

          आयुष्मान भारत योजनाइसका कारण है न्यू हॉस्पिटल इनपैनलमेंट मॉड्यूल ( 2.0 के तहत लागू किए गए नए और कड़े मापदंड, जिन्हें छोटे और मंझोले अस्पतालों के लिए पूरा करना मुश्किल हो गया है। नए नियमों के अनुसार हर 20 बिस्तरों पर तीन एमबीबीएस डॉक्टरों की अनिवार्य पोस्टिंग करनी होगी। इसके अलावा प्रत्येक अस्पताल में एनेस्थीसिया डॉक्टर की स्थायी नियुक्ति जरूरी होगी। नए दिशानिर्देशों में यह भी कहा गया है कि सुपर स्पेशलिस्ट डॉक्टर यदि किसी अस्पताल में पूर्णकालिक हैं, तो वे किसी अन्य अस्पताल में सेवाएं नहीं दे सकते। ऑन-कॉल सेवाएं देने वाले स्पेशलिस्ट और सुपर स्पेशलिस्ट अधिकतम तीन अस्पतालों से ही जुड़े रह सकते हैं। साथ ही केवल एमबीबीएस डिग्री पर आयुष्मान योजना के तहत इलाज की मान्यता नहीं मिलेगी; संबंधित विशेषज्ञ डॉक्टर की उपलब्धता अनिवार्य होगी।

          ग्रामीण इलाकों के अस्पताल हो रहे प्रभावित

          छोटे और ग्रामीण इलाकों के अस्पताल इन नियमों से सबसे अधिक प्रभावित हो रहे हैं। राज्य में कुल सुपर स्पेशलिस्ट डॉक्टरों की संख्या लगभग 420 है, जबकि स्पेशलिस्ट डॉक्टरों की संख्या 2,500 है। इनमें से अधिकांश पहले से ही सरकारी अस्पताल, मेडिकल कॉलेज या प्रशासनिक जिम्मेदारियों में कार्यरत हैं। ऐसे में छोटे अस्पताल इन मापदंडों के अनुसार डॉक्टरों की नियुक्ति नहीं कर सकते, जिससे ग्रामीण इलाकों में इलाज बंद होने का जोखिम बढ़ गया है।

          नए सिरे से रजिस्ट्रेशन कराना होगा अनिवार्य

          आयुष्मान भारत योजना में तकनीकी बदलाव के तहत सभी अनुबंधित अस्पतालों को नए सिरे से रजिस्ट्रेशन कराना अनिवार्य कर दिया गया है। यह प्रक्रिया न्यू एचईएम 2.0 नामक वेब आधारित पोर्टल के माध्यम से होगी। यदि कोई अस्पताल इस प्रक्रिया में शामिल नहीं होता या तय मानकों को पूरा नहीं कर पाता, तो उसका आयुष्मान योजना से अनुबंध स्वत: रद्द कर दिया जाएगा। इसका सीधा असर मरीजों पर पड़ेगा, जिन्हें निजी अस्पतालों में मुफ्त इलाज मिलने में बाधा आएगी।

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