सेंट्रल जेल की महिला वार्डर को मिली राहत, कोर्ट ने 60 दिन की अतिरिक्त छुट्टी मंजूर करने के दिए निर्देश
बिलासपुर (AkhandBharatHNKP.Com)। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने चाइल्ड केयर लीव (सीसीएल) को लेकर महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा है कि कर्मचारियों की कमी या प्रशासनिक असुविधा का हवाला देकर किसी महिला कर्मचारी को उसके वैधानिक अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता। अदालत ने बिलासपुर सेंट्रल जेल की महिला वार्डर की याचिका स्वीकार करते हुए जेल प्रशासन का आदेश निरस्त कर दिया और सात दिनों के भीतर 60 दिन की अतिरिक्त चाइल्ड केयर लीव स्वीकृत करने के निर्देश दिए हैं।
मामले के अनुसार, बिलासपुर सेंट्रल जेल में पदस्थ महिला वार्डर ने सितंबर 2025 में जुड़वां बच्चों को जन्म दिया था। बच्चों की देखभाल के लिए उन्होंने अप्रैल से जुलाई 2026 तक 90 दिनों की चाइल्ड केयर लीव ली थी। नवजात शिशुओं की देखभाल की जरूरत को देखते हुए उन्होंने 60 दिन की अतिरिक्त छुट्टी के लिए आवेदन किया, जिसे जेल प्रशासन ने स्टाफ की कमी का हवाला देते हुए अस्वीकार कर दिया।
हाईकोर्ट ने प्रशासन का फैसला किया निरस्त
महिला कर्मचारी ने इसके खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दायर की। सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने तर्क दिया कि जेल में महिला वार्डरों के कई पद रिक्त हैं, इसलिए प्रशासनिक कारणों से अवकाश देना संभव नहीं था। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद न्यायमूर्ति बी.डी. गुरु की एकलपीठ ने स्पष्ट किया कि चाइल्ड केयर लीव का उद्देश्य छोटे बच्चों की देखभाल के लिए मां को पर्याप्त समय उपलब्ध कराना है। यदि कर्मचारी नियमों के तहत पात्र है, तो केवल स्टाफ की कमी के आधार पर उसका वैधानिक अधिकार नहीं छीना जा सकता।
वैकल्पिक व्यवस्था करना नियोक्ता की जिम्मेदारी
हाईकोर्ट ने कहा कि प्रशासनिक व्यवस्था बनाए रखना नियोक्ता की जिम्मेदारी है। कर्मचारियों की कमी का भार महिला कर्मचारी पर नहीं डाला जा सकता। अदालत ने जेल प्रशासन को सात दिनों के भीतर महिला वार्डर की 60 दिन की अतिरिक्त चाइल्ड केयर लीव स्वीकृत करने का निर्देश दिया है।

