🙏🌺शक्ति के स्वरूप विभिन्न हो सकते हैं,
कहीं वह माँ दुर्गा के रूप में दिखती है,
कहीं करुणा बनकर बहती है,
कहीं त्याग, तपस्या और सेवा के रूप में प्रकट होती है।लेकिन इन सभी शक्तियों का मूल एक ही है —
“परा-प्रकृति शक्ति”
वह दिव्य चेतना, जो सम्पूर्ण सृष्टि को संचालित करती है।
मनुष्य जब अहंकार, भेदभाव और बाहरी आडंबर से ऊपर उठकर उस एक शक्ति को पहचान लेता है,
तभी उसके भीतर शांति, प्रेम और आत्मबल का उदय होता है।माँ का स्वरूप अलग-अलग हो सकता है,
पर मातृत्व की ऊर्जा एक ही होती है।
धर्म अलग हो सकते हैं,
पर सत्य का प्रकाश एक ही होता है।
मार्ग अलग हो सकते हैं,
पर मंज़िल वही परम चेतना है।आइए, उसी आदिशक्ति के प्रति श्रद्धा, समर्पण और कृतज्ञता प्रकट करें।
“शक्ति के स्वरूप विभिन्न हो सकते हैं पर!
परा – प्रकृति शक्ति तो एक ही है!”🙏 जय मां गुरू 🙏

“शक्ति के स्वरूप विभिन्न हो सकते हैं पर ! परा – प्रकृति शक्ति तो एक ही है!”
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