डेढ़ साल बाद आया फैसला, कन्या पूजन के दिन की थी वारदात; शव कार में छिपाकर पुलिस के साथ करता रहा तलाश
दुर्ग (AkhandBharatHNKP.Com)। छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में छह वर्षीय बच्ची से दुष्कर्म और उसकी हत्या के मामले में विशेष पॉक्सो अदालत ने उसके सगे चाचा को फांसी की सजा सुनाई है। करीब डेढ़ साल तक चली न्यायिक प्रक्रिया के बाद 10 सितंबर को अदालत ने आरोपी को दोषी करार देते हुए मृत्युदंड दिया। हालांकि फांसी की सजा पर उच्च न्यायालय की मंजूरी की औपचारिक प्रक्रिया अभी बाकी है।

बता दें कि मामला मोहन नगर थाना क्षेत्र का है। घटना 6 अप्रैल 2025 की है। उस दिन बच्ची अपनी बुआ-दादी के घर कन्या पूजन के कार्यक्रम में पहुंची थी। घर की महिलाएं पूजा और भोजन की तैयारियों में व्यस्त थीं। इसी दौरान 24 वर्षीय चाचा बच्ची को बहला-फुसलाकर मकान की छत पर बने अधूरे कमरे में ले गया। आरोप है कि वहां उसने बच्ची के साथ दुष्कर्म किया और उसकी चीख दबाने के लिए गला घोंट दिया। बच्ची के शरीर को सिगरेट से दागने की बात भी जांच में सामने आई। आरोपी को लगा कि बच्ची की मौत हो चुकी है। इसके बाद उसने शव को ठिकाने लगाने के लिए पड़ोसी की पुरानी कार को चुना। कार का एक दरवाजा खराब होने की जानकारी आरोपी को थी। उसने बच्ची के अचेत शरीर को कार के पिछले हिस्से में छिपा दिया। परिवार को बच्ची के लापता होने की जानकारी मिलने पर उसकी तलाश शुरू हुई। पुलिस भी मौके पर पहुंची और आसपास के सीसीटीवी फुटेज खंगाले गए। बच्चों और परिवार के लोगों से पूछताछ की गई। इसी दौरान पुलिस की नजर आरोपी के व्यवहार पर गई।
पुलिस के साथ बच्ची को ढूंढने का नाटक
सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि आरोपी खुद पुलिस और परिजनों के साथ बच्ची की तलाश में शामिल रहा। वह बार-बार उसी कार के पास जाता और उसे देखता था, जिसमें बच्ची को छिपाया गया था। सादे कपड़ों में निगरानी कर रहे पुलिसकर्मियों को उसका यह व्यवहार संदिग्ध लगा। पुलिस ने कार की तलाशी ली तो बच्ची गंभीर हालत में मिली। बताया गया कि उस समय उसकी सांसें चल रही थीं। उसे तत्काल अस्पताल ले जाया गया, लेकिन इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।
पड़ोसी को फंसाने की कोशिश
जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी और कार मालिक के बीच पुरानी रंजिश थी। पुलिस के मुताबिक, आरोपी ने इसी वजह से बच्ची को पड़ोसी की कार में छिपाया, ताकि शक कार मालिक पर जाए। घटना के बाद आक्रोशित लोगों ने कार और मकान में तोडफ़ोड़ की थी। इलाके में तनाव को देखते हुए पुलिस बल तैनात करना पड़ा था। शुरुआत में बच्ची के परिजनों ने भी पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए चाचा को फंसाए जाने की आशंका जताई थी। पुलिस ने मामले की जांच के लिए 10 सदस्यीय विशेष जांच दल गठित किया था। 9 मई 2025 को अदालत में आरोप पत्र पेश किया गया और 26 मई को आरोपी के खिलाफ आरोप तय किए गए। 11 जून 2025 से गवाहों के बयान दर्ज होने शुरू हुए। सुनवाई के दौरान कुछ गवाह अपने बयानों से मुकर गए, लेकिन वैज्ञानिक साक्ष्यों ने अभियोजन पक्ष के मामले को मजबूती दी। घटनास्थल और आरोपी के कपड़ों से मिले जैविक नमूनों की डीएनए जांच में महत्वपूर्ण मिलान सामने आया। बच्ची के शरीर पर मिले चोट, दागने और अन्य निशानों की भी चिकित्सकीय जांच में पुष्टि हुई। विशेष पॉक्सो अदालत ने 2 सितंबर 2026 को सुनवाई पूरी कर फैसला सुरक्षित रख लिया था। 10 सितंबर को अदालत ने आरोपी को दुष्कर्म और हत्या का दोषी मानते हुए फांसी की सजा सुनाई।

