भगवान हम पर दया क्यों नहीं करते हैं ?

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          भगवान

          जय माँ गुरु

          देव मूर्तियों में प्राण प्रतिष्ठा होती है । बहुत से गये गुजरे लोग भी मन्दिर बनाकर विष्णु , राम भगवान और देवी-देवता की मूर्ति में अपना प्राण स्थापित करते हैं , प्राण-प्रतिष्ठा कराते हैं । वही लोग प्राण-प्रतिष्ठित मनुष्य या प्राणी में जो परमात्मा है उनकी घनघोर उपेक्षा करते हैं और फिर कहते हैं कि हे भगवान हम पर दया क्यों नहीं करते हैं ?

          एक तरफ हम भगवान को लाठी लेकर मारते फिर रहें हों और दूसरी तरफ हम दया की भीख मांगते फिर रहें हों तो हमसे अधम और निर्लज्ज कौन है ?

          जिसको कभी किसी की पीड़ा नहीं सुनाई पड़ती है, उसको ध्यान समाधि में संगीत सुनाई पड़ता है , इससे बढ़कर झूठापन तथा ढकोसला और क्या होगा ?

          ||पूज्यपाद अघोरेश्वर महाप्रभु||

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