जग्गी हत्याकांड : अमित जोगी को सुप्रीम कोर्ट से मिली राहत, अगली सुनवाई तक सरेंडर पर रोक

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      बिलासपुर (AkhandBharatHNKP.Com)। पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी के पुत्र अमित जोगी को रामावतार जग्गी हत्याकांड में सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। सर्वोच्च न्यायालय ने अंतरिम आदेश जारी करते हुए सीबीआई से जवाब मांगा है और अगली सुनवाई तक अमित जोगी के आत्मसमर्पण के आदेश पर रोक लगा दी है।

          अमित जोगी की ओर से दो आदेशों को चुनौती दी गई थी। पहला आदेश वह था जिसमें सीबीआई को अपील करने की अनुमति दी गई थी, जबकि दूसरा छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का फैसला था, जिसमें उन्हें हत्या का दोषी मानते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी। अब दोनों मामलों की सुनवाई एक साथ की जाएगी। इससे पहले हाईकोर्ट ने 6 अप्रैल को भारतीय दंड संहिता की धारा 302 और 120-बी के तहत अमित जोगी को दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी। साथ ही तीन सप्ताह के भीतर आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया गया था। इसी आदेश के खिलाफ उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर की थी।

          अमित जोगी ने न्यायपालिका पर जताया भरोसा

          अमित जोगी ने पूर्व में सोशल मीडिया पर लिखा था कि सर्वोच्च न्यायालय ने दोनों मामलों को एक साथ सूचीबद्ध कर दिया है। उन्होंने अपनी कानूनी टीम का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उन्हें न्यायपालिका पर पूरा विश्वास है।

          वर्ष 2003 में हुई थी हत्या

          बता दें कि 4 जून 2003 को एनसीपी नेता रामावतार जग्गी की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस मामले में कुल 31 लोगों को आरोपी बनाया गया था। इनमें बुल्टू पाठक और सुरेंद्र सिंह सरकारी गवाह बन गए थे। अमित जोगी को छोड़कर बाकी 28 आरोपियों को सजा सुनाई गई थी। हालांकि, 31 मई 2007 को रायपुर की विशेष अदालत ने साक्ष्यों के अभाव में अमित जोगी को बरी कर दिया था। इसके बाद रामावतार जग्गी के पुत्र सतीश जग्गी ने इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी। बाद में यह मामला हाईकोर्ट को भेज दिया गया था।

          रामावतार जग्गी हत्याकांड : हाईकोर्ट ने अमित जोगी को दोषी ठहराया, 3 हफ्ते में सरेंडर का आदेश

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