Aghor Guru Peeth Trust Banora : अघोर गुरुपीठ बनोरा में 32 वर्ष से जल रही मानव सेवा की अखंड ज्योत, पूज्य बाबा सदगुरु प्रियदर्शी राम जी का जीवन मानव सेवा के लिए समर्पित

      Date:

          Aghor Guru Peeth Trust Banora

          परम पूज्य अघोरेश्वर भगवान राम जी

          रायगढ/कोरबा ( AkhandBharatHNKP.Com) परम पूज्य अघोरेश्वर भगवान राम जी के अनन्य प्रिय शिष्य पूज्य बाबा सदगुरु प्रियदर्शी राम जी 32 वर्ष पूर्व  रायगढ़ के ग्राम बनोरा में पीड़ित मानव की सेवा हेतु नन्हा बीज रोपा था वह तीन

          Aghor Ashram Banora

          परम पूज्य बाबा प्रियदर्शी राम जी।

          दशकों में वट वृक्ष बन गया है इस विशाल वट वृक्ष की शाखाएं छत्तीसगढ़ के शिवरीनारायण, डभरा, चिरमिरी, अंबिकापुर सहित अन्य प्रांत उत्तरप्रदेश के रेणुकोट, बिहार के कैमुर जिले के जिगना, झारखण्ड के आदर एवं रांची तक विस्तारित हो गई है।  अघोर गुरुपीठ बनोरा आश्रम की सभी शाखाओ में पीड़ित मानव सेवा का कार्य अनवरत जारी है।

          संस्था के मूल उद्देश्यों में  यह शामिल

          • राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखना
          • मानव मात्र को भाई समझना
          • नारी के लिए मातृभाव रखना
          • शिक्षोन्मुखी वातावरण निर्मित करना
          • असहाय व उपेक्षित लोगों की सेवा
          • अंधविश्वास, नशाखोरी, तिलक-दहेज उन्मूलन कार्य

          banora ashram 6 1

          अघोर गुरु पीठ ट्रस्ट बनोरा द्वारा संचालित स्कूल के छात्र -छात्राए

          छत्तीसगढ के सबसे बड़ी आध्यात्मिक पाठशाला अघोर गुरु पीठ ट्रस्ट बनोरा में पीड़ित मानव की सेवा के साथ-साथ आम जनमानस के जीवन से अज्ञानता के अंधकार को दूर करने एवम मनुष्य को मोक्ष की राह बताने का कार्य भी किया जा रहा है।  अघोर गुरु पीठ ट्रस्ट बनोरा प्रदेशवासियों के लिए अनमोल धरोहर बन गया है। 32 वर्ष पूर्व  अघोर पंथ का बीजारोपण करने वाले वाले महान संत पूज्य अघोरेश्वर भगवान राम जी के प्रिय शिष्य पूज्य बाबा सदगुरु प्रियदर्शी राम जी ने अघोर पंथ की पावन परंपरा का विस्तार किया।  अघोर गुरु पीठ ट्रस्ट बनोरा आश्रम की अध्यात्मिक शिक्षा ने मानव समाज को यह बताया कि समस्याओ का समाधान बाहर नही है अपितु मानव के मन मस्तिष्क के अंदर मौजूद है। अंतिम पंक्ति में खड़े साधन विहीन लोगों को जीवन की मूलभूत आवश्यकता चिकित्सा शिक्षा उपलब्ध कराने की योजना ट्रस्ट के अहम उद्दश्यों में शामिल है।

           चरित्र निर्माण को महत्व

          परम पूज्य अघोरेश्वर भगवान राम जी ने सबल राष्ट्र की कल्पना को  साकार करने के लिए चित्र निर्माण की बजाय चरित्र निर्माण को महत्व दिया।ऐसी पाठशाला जहां चरित्र निर्माण आसानी से हो जाए। सही मायने में  अघोर गुरुपीठ ट्रस्ट बनोरा मानव जाति के लिये ऐसे चरित्र की पाठशाला है जहां से मनुष्य स्वयं को सहजता से बदल सकता  है। परम पूज्य महाप्रभु अघोरेश्वर जी  की मंशा अनुरूप अघोर गुरुपीठ ट्रस्ट बनोरा की मौजूदा व्यवस्थायें स्वत: ही राष्ट्र निर्माण का मार्ग प्रशस्त कर रही हैं।

          श्मशान से समाज की ओर

          Aghor Guru Peeth Trust Banora

          आशीर्वचन का श्रवण करते हुए भक्तगण व छात्र -छात्राए

          परम पूज्य अघोरेश्वर भगवान राम जी ने श्मशान से समाज की ओर अवधारणा का  श्रीगणेश तो कर दिया लेकिन इस दिशा में बहुत सारे कार्य किये जाने शेष थे। जिसे पूज्य बाबा सदगुरु प्रियदर्शी राम जी परम पूज्य अघोरेश्वर भगवान राम जी शेष अधूरे कार्यो को पूरा कर रहे है। अघोर गुरुपीठ बनोरा ट्रस्ट का पत्ता पत्ता समाज की अंतिम पंक्ति में खड़े साधन विहीन बेबश बेसहारा लोगो को शीतल छाया का अहसास करा रहा है। समाज का बड़ा तबका संस्था द्वारा बताए गए मार्ग का  अनुशरण कर रहा है। साथ ही समाज के संपन्न वर्ग को जीवन के उद्देश्य कला और संस्कारों के महत्व का भी अनवरत बोध करा रहा है।

          घासीदास, अमृतलाल एवं नंदलाल व उनके परिवार का आभार

          सदैव हरियाली से आच्छादित रहने वाले इस अघोर गुरूपीठ का निर्माण घासीदास अमृतलाल एवं नंदलाल के द्वारा दान स्वरूप दी गई साढ़े तीन एकड़ जमीन में किया गया है। दान को परम्परा को अक्षुण्ण बनाए रखने के लिए संस्था हर वर्ष परिवार जनों का आभार व्यक्त करती है।

              Share post:

              Popular

              More like this
              Related

              खेल जीवन में अनुशासन, आत्मविश्वास और ऊर्जा भरता है : उपमुख्यमंत्री अरुण साव

              विद्याभारती मध्य क्षेत्रीय कबड्डी प्रतियोगिता का समापन, विजेता...