कोरबा (AkhandBharatHNKP.Com)। महिला आरक्षण को लेकर केंद्र सरकार द्वारा लाए गए विधेयक पर पूर्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि कांग्रेस महिला आरक्षण के खिलाफ नहीं है, बल्कि इसके अधूरे, भ्रामक और विलंबकारी स्वरूप का विरोध कर रही है। उनका आरोप है कि केंद्र सरकार ने इस मुद्दे को महिलाओं के सशक्तिकरण से ज्यादा राजनीतिक लाभ और महिला वोट बैंक साधने के उद्देश्य से आगे बढ़ाया है।
टीपी नगर स्थित कांग्रेस कार्यालय में आयोजित पत्रकार वार्ता में जयसिंह अग्रवाल ने कहा कि पांच राज्यों के चुनावी माहौल के बीच अचानक विशेष सत्र बुलाकर महिला आरक्षण विधेयक लाना सरकार की मंशा पर सवाल खड़े करता है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2023 में यह विधेयक पारित हो चुका था, ऐसे में इसे 2024 से लागू किया जाना चाहिए था, लेकिन सरकार ने इसे जनगणना और परिसीमन से जोड़कर अनावश्यक रूप से टाल दिया। उन्होंने कहा कि यह समझ से परे है कि पहले से पारित कानून को लागू करने में आखिर बाधा क्या है। इससे साफ संकेत मिलता है कि सरकार की प्राथमिकता महिला सशक्तिकरण नहीं, बल्कि राजनीतिक लाभ लेना है। पत्रकार वार्ता में जिला अध्यक्ष मुकेश राठौर, विकास सिंह, कृपाराम साहू, कुसुम द्विवेदी, संतोष राठौर, पालूराम साहू सहित अन्य कांग्रेसजन उपस्थित रहे।
जयसिंह अग्रवाल ने कहा कि यह विधेयक सामाजिक न्याय की कसौटी पर खरा नहीं उतरता। इसमें ओबीसी, पिछड़े और वंचित वर्ग की महिलाओं के लिए अलग प्रावधान नहीं किया गया है, जिससे इन वर्गों की महिलाओं को पर्याप्त राजनीतिक प्रतिनिधित्व नहीं मिल सकेगा। उन्होंने कहा कि यदि आरक्षण कानून में समावेशिता नहीं होगी तो इसका लाभ सीमित वर्ग तक ही सिमट जाएगा और सामाजिक असमानता और बढ़ेगी।
लागू करने की समय सीमा नहीं
पूर्व मंत्री ने कहा कि सरकार ने कानून लागू करने को लेकर कोई स्पष्ट समयसीमा तय नहीं की है। इससे यह आशंका गहराती है कि महिला आरक्षण को जानबूझकर वर्षों तक लंबित रखा जा सकता है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस की मांग है कि महिला आरक्षण ऐसा हो जो न्यायपूर्ण, समावेशी और तुरंत लागू होने वाला हो। अधूरा कानून लाकर सिर्फ राजनीति करना देश की महिलाओं के साथ अन्याय है।
राज्य सरकार पर भी साधा निशाना
जयसिंह अग्रवाल ने प्रदेश सरकार के सवा दो साल के कार्यकाल पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि सरकार के अपने नेता और विधायक भी दबी जुबान में स्वीकार कर रहे हैं कि सरकार किस दिशा में काम कर रही है, यह समझ से परे है।उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश में भ्रष्टाचार और अपराध बढ़े हैं, जबकि विकास कार्य सिर्फ कागजों और प्रचार तक सीमित हैं। जमीन पर कोई बड़ा बदलाव दिखाई नहीं देता। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार ने स्वामी आत्मानंद स्कूलों की शुरुआत बेहतर शिक्षा के उद्देश्य से की थी, लेकिन अब विद्यार्थियों से फीस वसूली की तैयारी हो रही है। वहीं 400 यूनिट तक बिजली बिल माफी योजना बंद कर पहले 100 और अब 200 यूनिट तक सीमित कर दिया गया है।

