फर्जी डॉक्टर बनकर करता रहा हार्ट ऑपरेशन, पुलिस ने पेश की चार्जशीट, अब सीबीआई जांच की मांग

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      • पूर्व विधानसभा अध्यक्ष राजेंद्र प्रसाद शुक्ल की मौत के बाद सुर्खियों में आया मामला, अस्पताल प्रबंधन को राहत

      बिलासपुर (AkhandBharatHNKP.Com)। बिलासपुर के बहुचर्चित फर्जी हृदय रोग विशेषज्ञ (कार्डियोलॉजिस्ट) मामले की पुलिस जांच पूरी हो गई है। पुलिस ने आरोपी डॉ. नरेन्द्र विक्रमादित्य यादव के खिलाफ न्यायालय में चालान (चार्जशीट) पेश कर दिया है। वहीं, पर्याप्त आपराधिक साक्ष्य नहीं मिलने के आधार पर अपोलो अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की गई है। दूसरी ओर, पूर्व विधानसभा अध्यक्ष स्वर्गीय राजेंद्र प्रसाद शुक्ल के परिजनों ने जांच पर सवाल उठाते हुए पूरे मामले की सीबीआई जांच की मांग की है।

          पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपी ने स्वयं को एमबीबीएस, एमआरसीपी और इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजिस्ट बताकर अपोलो अस्पताल में सलाहकार चिकित्सक के रूप में कार्य किया। इस दौरान उसने कई मरीजों की एंजियोग्राफी और एंजियोप्लास्टी भी की। हालांकि, पूछताछ के दौरान वह अपनी विशेषज्ञता से जुड़े वैध दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सका। जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी ने कथित रूप से “नरेन्द्र जॉन कैम” नाम से आधार कार्ड, पैन कार्ड सहित अन्य दस्तावेज तैयार कराए थे। पुलिस ने छत्तीसगढ़ मेडिकल काउंसिल, उत्तर बंगाल मेडिकल कॉलेज, दमोह पुलिस, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी कार्यालय और अपोलो अस्पताल सहित कई संस्थानों से दस्तावेज जुटाए, लेकिन उसके शैक्षणिक और पेशेवर दावों की पुष्टि नहीं हो सकी।

          27 मरीजों की मौत का उल्लेख, लेकिन साक्ष्य नहीं मिले

          जांच के दौरान आरोपी के कार्यकाल में इलाज कराने वाले 27 मरीजों की मृत्यु का उल्लेख सामने आया। हालांकि, पर्याप्त चिकित्सीय अभिलेख और औपचारिक शिकायतें उपलब्ध नहीं होने के कारण पुलिस इन मौतों को कानूनी रूप से आरोपी की कथित फर्जी विशेषज्ञता से सीधे नहीं जोड़ सकी। इस मामले में केवल दो लोगों ने विधिवत शिकायत दर्ज कराई थी।

          अस्पताल प्रबंधन को क्लीन चिट

          पुलिस के अनुसार, अस्पताल प्रबंधन और चयन समिति की भूमिका की अलग से जांच की गई, लेकिन ऐसा कोई ठोस साक्ष्य नहीं मिला जिससे यह साबित हो सके कि आरोपी की नियुक्ति जानबूझकर या किसी आपराधिक षड्यंत्र के तहत की गई थी। इसी आधार पर अस्पताल प्रबंधन के विरुद्ध क्लोजर रिपोर्ट न्यायालय में प्रस्तुत की गई है।

          पूर्व विधानसभा अध्यक्ष की मौत के बाद उठा मामला

          यह मामला उस समय फिर चर्चा में आया जब मध्यप्रदेश के दमोह से आरोपी की गिरफ्तारी हुई। इसके बाद पूर्व विधानसभा अध्यक्ष स्वर्गीय राजेंद्र प्रसाद शुक्ल के पुत्र प्रो. प्रदीप शुक्ल ने शिकायत दर्ज कराई कि वर्ष 2006 में उनके पिता का इलाज भी इसी डॉक्टर ने किया था। अस्पताल के अभिलेखों के अनुसार, डॉ. नरेन्द्र ने उनकी एंजियोग्राफी और एंजियोप्लास्टी की थी। उपचार के दौरान उनकी तबीयत बिगड़ गई और बाद में उनका निधन हो गया।

          सीबीआई जांच की मांग, अदालत के फैसले पर निगाहें

          पीड़ित परिवार ने पुलिस जांच को अधूरा बताते हुए पूरे मामले की सीबीआई से जांच कराने की मांग की है। फिलहाल आरोपी चिकित्सक के खिलाफ मामला न्यायालय में विचाराधीन है। वहीं, अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि न्यायालय पुलिस की क्लोजर रिपोर्ट स्वीकार करता है या मामले में आगे की जांच के निर्देश देता है।

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