शिक्षा विभाग के प्राचार्यों को रोज 2 पीरियड पढ़ाने के फरमान पर शिक्षक संघ नाराज, बोला- पहले कमी दूर करे विभाग

      Date:

      • हर दिन कम से कम दो पीरियड लेना होगा अनिवार्य, पढ़ाई की गुणवत्ता और विद्यार्थियों की प्रगति पर रखेंगे नजर

      रायपुर (AkhandBharatHNKP.Com)। छत्तीसगढ़ में सरकारी स्कूलों की शैक्षणिक व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए शिक्षा विभाग ने प्राचार्यों की जिम्मेदारियों में बदलाव किया है। नई व्यवस्था के तहत अब प्राचार्यों को प्रशासनिक कामकाज के साथ नियमित रूप से कक्षाओं में भी पढ़ाना होगा। उन्हें प्रतिदिन कम से कम दो पीरियड लेना अनिवार्य किया गया है। विभाग का उद्देश्य प्राचार्यों को स्कूल की शैक्षणिक गतिविधियों से सीधे जोडऩा और पढ़ाई की गुणवत्ता में सुधार करना है।

          शिक्षा विभाग के इस फैसले पर छत्तीसगढ़ टीचर्स एसोसिएशन ने आपत्ति जताई है। प्रदेश अध्यक्ष संजय शर्मा ने कहा कि किसी एक स्कूल में व्यवस्था की कमी मिलने पर वहीं सुधार के निर्देश दिए जाने चाहिए थे। पूरे प्रदेश के करीब 5 हजार स्कूलों के प्राचार्यों के लिए एक जैसा आदेश उचित नहीं है। प्राचार्य का पद प्रशासनिक जिम्मेदारियों से जुड़ा है और वे पहले से ही जरूरत पडऩे पर कक्षाएं लेते हैं। उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप संकुल प्राचार्यों को अधिक अधिकार देने की मांग की है। बता दें कि अब तक प्राचार्यों का मुख्य दायित्व स्कूल का प्रशासनिक संचालन, शिक्षकों की व्यवस्था, अभिलेखों का संधारण और विभागीय निर्देशों का पालन करना रहा है। नई व्यवस्था में उन्हें इन जिम्मेदारियों के साथ शैक्षणिक गतिविधियों में भी सक्रिय भूमिका निभानी होगी। प्रतिदिन कक्षा लेने से प्राचार्य विद्यार्थियों से सीधे जुड़ सकेंगे और उन्हें स्कूल में पढ़ाई के वास्तविक स्तर की जानकारी मिलेगी। प्राचार्य कक्षाओं में पढ़ाने के दौरान शिक्षकों की उपस्थिति, विद्यार्थियों की पढ़ाई और उनकी शैक्षणिक प्रगति का भी आकलन कर सकेंगे। इससे स्कूल में नियमितता और अनुशासन बनाए रखने में मदद मिलने की उम्मीद है। इसके अलावा प्राचार्य यह भी देख सकेंगे कि पाठ्यक्रम निर्धारित समय के अनुसार पूरा हो रहा है या नहीं। पढ़ाई में कमजोर विद्यार्थियों की पहचान कर उनके लिए अतिरिक्त सहायता और सुधारात्मक कदम उठाए जा सकेंगे।

          शैक्षणिक व्यवस्था होगी और मजबूत

          शिक्षा विभाग का मानना है कि प्राचार्य का नियमित रूप से कक्षा में जाना केवल पढ़ाने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इससे पूरे विद्यालय की शैक्षणिक व्यवस्था पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। प्राचार्य प्रशासनिक कार्यों के साथ शिक्षण, निगरानी और विद्यार्थियों की प्रगति पर भी सीधे ध्यान दे सकेंगे। इस व्यवस्था से स्कूलों में पढ़ाई का माहौल बेहतर होने और विद्यार्थियों की शैक्षणिक गुणवत्ता में सुधार की उम्मीद जताई गई है।

          खाली पद भरने की मांग

          एसोसिएशन ने कहा कि विभाग को प्राचार्य, व्याख्याता, शिक्षक, सहायक शिक्षक, ग्रंथपाल, प्रयोगशाला शिक्षक और लिपिक के खाली पद भरने पर ध्यान देना चाहिए। स्कूलों में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों और चौकीदारों की कमी से भी रोजमर्रा की व्यवस्था प्रभावित हो रही है। एसोसिएशन ने स्कूलों में कमरों की कमी दूर करने की भी मांग की है। कई जगह प्राचार्य, लिपिक और स्टाफ के लिए अलग कमरे नहीं होने से एक ही कमरे में काम चलाया जा रहा है।

          छत्तीसगढ़ में बदलेगा स्कूलों का शैक्षणिक कैलेंडर, 1 अप्रैल से शुरू होगा नया सत्र

              Share post:

              Popular

              More like this
              Related