25 अक्टूबर तक खरीदी केंद्रों की तैयारी पूरी करने के निर्देश, वनपट्टाधारी और विशेष श्रेणी के किसानों के प्रकरणों का समय पर करें निराकरण
कोरबा (AkhandBharatHNKP.Com)। खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 में धान खरीदी की तैयारियों को लेकर कलेक्टर कुणाल दुदावत ने कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में अधिकारियों और समिति प्रबंधकों की बैठक लेकर विस्तृत समीक्षा की। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि किसी भी किसान को रकबे में कमी, खसरा छूटने या फसल प्रविष्टि में त्रुटि के कारण धान बेचने में परेशानी नहीं होनी चाहिए। पंजीयन, एग्रीस्टैक और फसल मिलान का काम निर्धारित समय-सीमा में पूरा करने के निर्देश दिए गए।

कलेक्टर ने कहा कि पिछले वर्ष पंजीकृत प्रत्येक किसान के सभी खसरों, फसलों और रकबे का एग्रीस्टैक से मिलान किया जाए। समिति प्रबंधक किसानों को बुलाकर बी-1 में दर्ज खसरों और फसलों की जांच कराएं। उन्होंने निर्देश दिया कि किसी भी किसान का एक भी पात्र खसरा छूटना नहीं चाहिए। तहसीलदार और अनुविभागीय अधिकारी राजस्व को तहसीलवार एवं समितिवार प्रगति की नियमित समीक्षा करने को कहा गया। सभी समितियों को 21 अक्टूबर तक प्रमाण-पत्र देने के निर्देश दिए गए हैं कि पंजीकृत किसानों के सभी पात्र खसरे एग्रीस्टैक में दर्ज हैं।
बैठक में बताया गया कि जिले में 60 सक्रिय आदिम जाति सेवा सहकारी समितियों के अंतर्गत 73 धान खरीदी केंद्र हैं। समितियों में कुल 52,689 किसान पंजीकृत हैं, जिनमें से 52,383 किसानों का एग्रीस्टैक पंजीयन पूरा हो चुका है, जबकि 306 किसानों का पंजीयन अभी शेष है। कलेक्टर ने शेष पंजीयन जल्द पूरा कराने और अगले दो-तीन दिनों तक इसकी दैनिक निगरानी करने के निर्देश दिए। कलेक्टर ने वनपट्टाधारी, डुबान क्षेत्र, शासकीय भूमि और शासकीय पट्टाधारी किसानों के प्रकरणों को प्राथमिकता से पूरा करने के निर्देश दिए। ऐसे मामलों में भूमि विवरण, खसरा और अक्षांश-देशांतर की प्रविष्टि पूरी कराने को कहा गया। पिछले वर्ष पंजीकृत किसानों के 7,541 खसरे अद्यतन के लिए किसान अनुरोध आवेदन की प्रक्रिया में लंबित हैं। कलेक्टर ने इनकी तहसीलवार सूची तैयार कर समितिवार संबंधित समितियों को उपलब्ध कराने और निराकरण की नियमित समीक्षा करने के निर्देश दिए।
उन्होंने कहा कि वनपट्टाधारी और अन्य पात्र पट्टाधारी किसान पंजीयन के लिए संबंधित समितियों में आवेदन करें। 30 अक्टूबर के बाद प्राप्त आवेदन मान्य नहीं होंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि पात्र किसान का वास्तविक रकबा कम करना उद्देश्य नहीं है, बल्कि पंजीयन और अभिलेखों का सही मिलान सुनिश्चित करना है। धान खरीदी केंद्रों की तैयारियों की समीक्षा करते हुए कलेक्टर ने सभी केंद्रों को 25 अक्टूबर तक तैयार करने के निर्देश दिए। केंद्रों में साफ-सफाई, नमी मापक यंत्रों का अंशांकन, इलेक्ट्रॉनिक कांटा-बांट एवं तौल उपकरणों का सत्यापन, जैवमितीय उपकरण, बारदाने, जल निकासी, बैनर-पोस्टर और निगरानी समिति की व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा गया। नए खरीदी केंद्रों पर कंप्यूटर, प्रिंटर, स्कैनर, जनरेटर, ऑपरेटर और केंद्र प्रभारी की उपलब्धता भी समय पर सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। कर्मचारियों और ऑपरेटरों को आवश्यक प्रशिक्षण देने को भी कहा गया।
बैठक में अपर कलेक्टर देवेंद्र पटेल एवं ओंकार यादव, खाद्य अधिकारी घनश्याम कंवर, उप पंजीयक सहकारिता एम. मिंज, जिला विपणन अधिकारी ऋतुराज देवांगन, उप संचालक कृषि डीपीएस कंवर, सहकारी बैंक के नोडल अधिकारी सुशील जोशी, डिप्टी कलेक्टर तुलाराम भारद्वाज सहित एसडीएम, तहसीलदार, बैंक प्रबंधक, खाद्य निरीक्षक, सहकारिता निरीक्षक, कृषि अधिकारी, समिति प्रबंधक एवं ऑपरेटर उपस्थित रहे।
नवंबर के पहले सप्ताह में होगा परीक्षण
कलेक्टर ने बताया कि मास्टर ट्रेनर्स का प्रशिक्षण 12 से 16 अक्टूबर तक, जिला एवं अनुविभाग स्तर का प्रशिक्षण 19 से 27 अक्टूबर तक प्रस्तावित है। खरीदी केंद्रों की संभागवार समीक्षा और परीक्षण नवंबर के पहले सप्ताह में किया जाएगा। किसानों के लिए टोकन की प्रक्रिया 6 नवंबर से शुरू होने तथा धान उपार्जन अवधि 15 नवंबर से 31 जनवरी तक संभावित है। उन्होंने पीडीएस बारदानों का समय पर संग्रहण, बारदानों की उपलब्धता की निगरानी और बकेट क्लेम के लक्ष्य की समीक्षा करने के निर्देश दिए। प्रत्येक तहसीलदार को 10 गांव चिन्हित कर अक्टूबर में पटवारियों के माध्यम से बकेट क्लेम की शत-प्रतिशत कार्रवाई सुनिश्चित कराने को कहा गया।
किसानों से खसरों का मिलान कराने की अपील
कलेक्टर कुणाल दुदावत ने किसानों से अपील की कि वे अपनी संबंधित समिति में जाकर अपने सभी खसरों का मिलान कराएं और यह सुनिश्चित करें कि कोई भी खसरा पंजीयन से छूटा न हो। खसरे या पंजीयन में किसी प्रकार की त्रुटि पाए जाने पर तत्काल समिति स्तर पर सुधार कराएं। उन्होंने समिति प्रबंधकों को किसानों की समस्याओं का समय पर निराकरण करने के निर्देश भी दिए।
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