कलेक्टर दुदावत की पहल से स्थानीय हुनर को मिलेगा बाजार, दीपावली पर बांस के उत्पाद बनेंगे खास उपहार

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      • सेवा संकल्प अभियान में स्थानीय उत्पादों की प्रदर्शनी, कलेक्टर ने कारीगरों और महिला समूहों को बाजार से जोड़ने का दिया भरोसा

          पारंपरिक हुनर

          कोरबा (AkhandBharatHNKP.Com)। जिले में जनजातीय परिवारों, महिला स्व-सहायता समूहों और स्थानीय कारीगरों के पारंपरिक हुनर को बाजार से जोड़ने की दिशा में जिला प्रशासन ने पहल शुरू की है। सेवा संकल्प अभियान के तहत कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में स्थानीय उत्पादों की प्रदर्शनी लगाई गई। इसमें बांस से बनी टोकरी, सूपा, टुकनी, सजावटी सामग्री, कुम्हारों द्वारा तैयार खिलौने, कोसा वस्त्र और वनोपज से तैयार खाद्य सामग्री सहित कई पारंपरिक उत्पाद प्रदर्शित किए गए।

          पारंपरिक हुनर

          प्रदर्शनी में स्थानीय उत्पादों की विविधता ने कोरबा की जनजातीय कला और पारंपरिक हुनर की झलक दिखाई। साथ ही इन उत्पादों को बड़े बाजार तक पहुंचाने की संभावनाएं भी सामने आईं। जिला प्रशासन का उद्देश्य है कि स्थानीय स्तर पर तैयार होने वाले उत्पादों को राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिले तथा कारीगरों और महिला समूहों के लिए स्थायी आजीविका के अवसर तैयार हों। कलेक्टर कुणाल दुदावत ने कहा कि सेवा संकल्प अभियान के माध्यम से स्थानीय उत्पादों और उनसे जुड़े कारीगरों तथा महिला समूहों को प्रोत्साहित किया जा रहा है। ‘लोकल फॉर वोकल’ की भावना के अनुरूप जिला प्रशासन स्थानीय उत्पादों को बाजार उपलब्ध कराने का प्रयास कर रहा है। उन्होंने कहा कि यह पहल केवल प्रदर्शनी लगाने तक सीमित नहीं है। जनजातीय परिवारों, बिरहोर समाज, स्व-सहायता समूहों और स्थानीय महिलाओं द्वारा तैयार पारंपरिक वस्तुओं को उचित बाजार उपलब्ध कराना इसका मुख्य उद्देश्य है, ताकि इनसे जुड़े परिवारों की आय बढ़े और पारंपरिक हुनर आजीविका का मजबूत साधन बन सके। कार्यक्रम में जनप्रतिनिधि गोपाल मोदी, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव एवं व्यवहार न्यायाधीश डिंपल भेड़िया, जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी प्रतीक जैन, ट्राइफेड के संदीप शर्मा सहित अन्य जनप्रतिनिधि और अधिकारी मौजूद रहे।

          दीपावली में स्थानीय उत्पाद बनेंगे खास उपहार

          कलेक्टर ने आगामी दीपावली को ध्यान में रखते हुए महिला समूहों और कारीगरों को बांस से आकर्षक और उपयोगी उपहार सामग्री तैयार करने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने कहा कि दीपावली पर उपहार देने की परंपरा को स्थानीय उत्पादों से जोड़ा जा सकता है। बांस की आकर्षक टोकरियां, सजावटी सामग्री, उपयोगी वस्तुएं और अन्य उपहार सामग्री तैयार कर इन्हें बाजार में उतारा जा सकता है। जिला प्रशासन ऐसे उत्पादों को प्रोत्साहित करने और बाजार उपलब्ध कराने में सहयोग करेगा। इससे स्थानीय महिलाओं और कारीगरों को त्योहार के दौरान अतिरिक्त आय का अवसर मिल सकेगा।

          कारीगरों को मिलेगा मेहनत का उचित मूल्य

          कलेक्टर ने कहा कि बांस से बने उत्पादों की सजावट और दैनिक उपयोग के क्षेत्र में अच्छी मांग है। स्थानीय कला और पारंपरिक उत्पादों में रोजगार की व्यापक संभावनाएं हैं। खनन प्रभावित क्षेत्रों की महिलाओं सहित इन कलाओं से जुड़े कारीगरों को बेहतर आजीविका उपलब्ध कराने के लिए प्रशासन प्रयास कर रहा है। उन्होंने प्रदर्शनी में लगाए गए स्थानीय उत्पादों को जिला प्रशासन द्वारा क्रय किए जाने की बात भी कही। उनका उद्देश्य है कि उत्पाद तैयार करने वाली महिलाओं और कारीगरों को उनकी मेहनत का उचित मूल्य मिले और उनका पारंपरिक हुनर स्थायी आय का माध्यम बने। कलेक्टर ने बताया कि सेवा संकल्प अभियान के तहत 7 अक्टूबर को भी स्थानीय उत्पादों की प्रदर्शनी आयोजित की जाएगी। इसके माध्यम से स्थानीय उत्पादों को अधिक लोगों तक पहुंचाने और उन्हें बाजार से जोड़ने का प्रयास किया जाएगा।

          बांस के उत्पादों की अलग पहचान

          जिला पंचायत अध्यक्ष डॉ. पवन सिंह कंवर ने कहा कि बांस से तैयार उत्पादों की अपनी अलग पहचान और बाजार में मांग है। जनजातीय परिवारों, महिला स्व-सहायता समूहों और स्थानीय कलाकारों को उनके उत्पादों का उचित मूल्य दिलाने तथा बेहतर बाजार उपलब्ध कराने में ऐसे आयोजन महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। एमआईसी सदस्य एवं पार्षद नरेंद्र देवांगन ने कहा कि जनजातीय समाज और स्थानीय कारीगरों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के लिए उनके पारंपरिक उत्पादों को बाजार से जोड़ना जरूरी है। उन्होंने कहा कि सूपा, टुकनी, टोकरी सहित बांस से तैयार पारंपरिक वस्तुओं को आधुनिक जरूरतों के अनुरूप तैयार कर बाजार तक पहुंचाया जाए तो इनकी मांग और उपयोगिता बढ़ सकती है।

          सेवा संकल्प अभियान को लेकर कलेक्टर दुदावत ने प्राचार्यों को दिए आवश्यक निर्देश

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