हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, देरी से शिकायत पर रेरा नहीं कर सकता केस खारिज, मकान खरीदारों को राहत

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      बिलासपुर (AkhandBharatHNKP.Com)। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने मकान खरीदारों के हित में अहम फैसला सुनाते हुए कहा है कि रेरा यानी रियल एस्टेट नियामक प्राधिकरण एक विशेष नियामक संस्था है, इसे अदालत की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता। इसलिए रेरा में शिकायत दर्ज कराने के लिए किसी निश्चित समय-सीमा की बाध्यता नहीं है। केवल देरी के आधार पर शिकायत को खारिज करना उचित नहीं होगा।

          हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति बीडी गुरु ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि रेरा अधिनियम की धारा 31 के तहत शिकायत दर्ज करने के लिए कोई तय समय सीमा निर्धारित नहीं की गई है। ऐसे में रेरा या उसका अपीलीय प्राधिकरण सिर्फ देरी का हवाला देकर मामला खारिज नहीं कर सकता। बता दे की जगदलपुर निवासी निधि साव ने दुर्ग जिले के अमलेश्वर स्थित ग्रीन अर्थ सिटी परियोजना में एक फ्लैट बुक कराया था। उन्होंने बिल्डर पर समय पर कब्जा नहीं देने और घटिया निर्माण करने का आरोप लगाया। पहले उन्होंने स्थानीय प्रशासन से शिकायत की, लेकिन सुनवाई नहीं होने पर रेरा में याचिका दायर की। रेरा ने बिल्डर को दो महीने के भीतर निर्माण कार्य पूरा कर फ्लैट का कब्जा देने का आदेश दिया था। साथ ही खरीदार को बकाया राशि जमा करने के निर्देश भी दिए गए थे। इस आदेश के खिलाफ खरीदार ने रेरा अपीलीय न्यायाधिकरण में अपील दायर की।

          खरीदारों को मिलेगी राहत

          अपीलीय न्यायाधिकरण ने मामले की सुनवाई करने के बजाय शिकायत में देरी का कारण बताते हुए अपील खारिज कर दी थी। इसके बाद निधि साव ने इस आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी। हाईकोर्ट ने अपीलीय न्यायाधिकरण का आदेश निरस्त करते हुए मामला दोबारा सुनवाई के लिए वापस भेज दिया है। अदालत ने निर्देश दिया है कि अब प्रकरण की सुनवाई तथ्यों और गुण-दोष के आधार पर की जाए, न कि तकनीकी कारणों से। इस फैसले को रियल एस्टेट क्षेत्र में मकान खरीदारों के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है। अब बिल्डरों के खिलाफ शिकायत करने वाले उपभोक्ताओं के मामलों में देरी को आधार बनाकर उन्हें न्याय से वंचित नहीं किया जा सकेगा।

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