रायगढ़ (AkhandBharatHNKP.Com)। रायगढ़ जिले में एक अनोखी परंपरा के तहत दूल्हा-दुल्हन ने जलते अंगारों पर चलकर गृह प्रवेश किया। गंधेल गोत्र के परिवार में यह परंपरा वर्षों से चली आ रही है। यह रस्म भूपदेवपुर थाना क्षेत्र अंतर्गत बिलासपुर गांव में देखी गई।

बता दें कि बिलासपुर गांव निवासी जयप्रकाश राठिया का विवाह बाड़ादरहा गांव की पुष्पा राठिया से 27 अप्रैल को संपन्न हुआ। विवाह के बाद जब दुल्हन ससुराल पहुंची तब पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ उसका स्वागत किया गया। नवदंपती को नए वस्त्र और आभूषण भेंट किए गए। परिजनों ने बताया कि दुल्हन के गृह प्रवेश तक परिवार के सदस्य उपवास रखते हैं। इस दौरान अन्न तो दूर, पानी तक ग्रहण नहीं किया जाता। दूल्हे के पिता मेहत्तर राठिया ने बताया कि बहू के घर पहुंचने के बाद ही परिवारजन व्रत खोलते हैं। रस्म के तहत सबसे पहले घर में बने मंडप की पूजा की गई। इसके बाद गांव के बैगा पर देवता आने की मान्यता के साथ उन्होंने चूल्हे से लाल दहकते अंगारे निकालकर मंडप के बीच बिछा दिए गए। पहले बैगा स्वयं अंगारों पर नाचे, फिर दूल्हा-दुल्हन ने हाथ थामकर उन्हीं अंगारों पर सात फेरे लिए। इस दौरान किसी को कोई चोट नहीं पहुंची। ग्रामीणों के अनुसार इस परंपरा के दौरान दो बकरों की बलि देने की भी प्रथा है।
पवित्रता और सुखी वैवाहिक जीवन की मान्यता
परिवार के लोगों का मानना है कि अंगारों पर चलना केवल रस्म नहीं, बल्कि पवित्रता और साहस का प्रतीक है। ऐसी मान्यता है कि जो नवदंपती इस अग्नि परीक्षा जैसी परंपरा को निभाता है, वह जीवन की कठिनाइयों का सामना मिलकर करने की शक्ति प्राप्त करता है।
शिव मंदिर में पूजा भी अनिवार्य
ग्रामीणों ने बताया कि बारात के प्रस्थान और वापसी के समय गांव के प्राचीन शिव मंदिर में पूजा करना भी परंपरा का हिस्सा है। इसी क्रम में जयप्रकाश की बारात ने मंदिर पहुंचकर नारियल फोड़ा और भगवान शिव का आशीर्वाद लिया।

