सक्ती (AkhandBharatHNKP.Com)। सक्ती जिले के सिंघीतराई स्थित वेदांता पावर प्लांट में हुए भीषण बॉयलर विस्फोट मामले की जांच अब तेज हो गई है। शुरुआती पड़ताल में यह मामला केवल तकनीकी दुर्घटना नहीं, बल्कि संचालन व्यवस्था और सुरक्षा प्रबंधन में संभावित लापरवाही से जुड़ा नजर आ रहा है। जांच एजेंसियों का फोकस अब प्लांट का संचालन और रखरखाव कर रही एनजीएसएल कंपनी पर केंद्रित हो गया है।
जानकारी के मुताबिक, एनजीएसएल, एनटीपीसी और जीई पावर इंडिया लिमिटेड का संयुक्त उपक्रम है, जिसमें दोनों कंपनियों की बराबर हिस्सेदारी है। देश की प्रतिष्ठित कंपनियों के सहयोग से संचालित इस इकाई में सुरक्षा मानकों पर सवाल उठना गंभीर विषय माना जा रहा है। हादसा प्लांट की 600 मेगावॉट क्षमता वाली बॉयलर यूनिट-1 में हुआ था। इस यूनिट का संचालन स्टेशन हेड राजेश सक्सेना की निगरानी में किया जा रहा था। जांच में यह बिंदु प्रमुखता से शामिल किया गया है कि क्या बॉयलर का दबाव बढ़ने के बाद भी चेतावनी संकेतों को अनदेखा किया गया था। साथ ही यह भी देखा जा रहा है कि निर्धारित सुरक्षा प्रक्रिया और संचालन मानकों का पालन हुआ था या नहीं। मामले की मजिस्ट्रियल जांच सक्ती कलेक्टर अमृत विकास तोपनो और पुलिस अधीक्षक प्रफुल्ल ठाकुर की देखरेख में जारी है। जिला प्रशासन ने आवश्यक दस्तावेजों को खंगालना शुरू कर दिया है। तकनीकी पहलुओं की निष्पक्ष जांच के लिए विशेषज्ञ टीम को भी शामिल किया गया है।
सौपी गई थी मेंटेनेंस की जिम्मेदारी
सूत्रों के अनुसार, वर्ष 2022 में वेदांता द्वारा प्लांट अधिग्रहण के बाद संचालन और मेंटेनेंस की जिम्मेदारी एनजीएसएल को सौंपी गई थी। कंपनी को मशीनों की निगरानी, समय पर मरम्मत, तकनीकी त्रुटियों की पहचान, सुरक्षा व्यवस्था तथा कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने का दायित्व दिया गया था। हादसे के बाद अब प्रशासन यह पता लगाने में जुटा है कि त्रासदी के पीछे संचालन में लापरवाही, रखरखाव में चूक या सुरक्षा प्रोटोकॉल की अनदेखी जिम्मेदार थी। जांच रिपोर्ट के बाद ही तय होगा कि इस भयावह हादसे के लिए जवाबदेही किस स्तर पर तय की जाएगी। उल्लेखनीय है कि वेदांता प्लांट में हुए इस भीषण हादसे में अब तक 24 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि कई घायलों का विभिन्न अस्पतालों में उपचार जारी है।

