अर्नब तूफान ने छत्तीसगढ़ के किसानों की मेहनत पर फेरा पानी, 60 घंटे में 60 हजार से अधिक शिकायतें दर्ज

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      • छत्तीसगढ़ में खरीफ फसलों को भारी नुकसान, 50,962 मामलों में सर्वे शुरू; 15 दिन के भीतर बीमा राशि भुगतान का दावा

      रायपुर (AkhandBharatHNKP.Com)। चक्रवाती तूफान अर्नब ने छत्तीसगढ़ के किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। तूफान के साथ हुई बारिश और तेज हवाओं ने प्रदेश के कई जिलों में खरीफ फसलों को नुकसान पहुंचाया है। खेतों में खड़ी और कटाई के लिए तैयार धान की फसल प्रभावित होने से किसानों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। नुकसान की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि महज 60 घंटे के भीतर प्रदेश के 60 हजार से अधिक किसानों ने फसल क्षति की सूचना बीमा कंपनियों को दी है।

          28 से 30 अक्टूबर 2026 के बीच किसानों ने टोल फ्री नंबर के माध्यम से अपनी शिकायतें दर्ज कराई हैं। प्राप्त शिकायतों में से 50,962 मामलों में बीमा कंपनियों ने सर्वेक्षण की प्रक्रिया शुरू कर दी है। वहीं, राज्य शासन ने राजस्व, कृषि एवं उद्यानिकी विभाग को प्रभावित क्षेत्रों में फसल नुकसान का आकलन कर मुआवजे से संबंधित प्रकरण तैयार करने के निर्देश दिए हैं। फसल नुकसान की सूचना दर्ज कराने के बाद अब किसानों की उम्मीदें बीमा कंपनियों के सर्वेक्षण पर टिकी हैं। सर्वे के आधार पर खेतों में हुए वास्तविक नुकसान का आकलन किया जाएगा। इसके बाद पात्र किसानों के बीमा दावों पर आगे की कार्रवाई होगी। बीमा कंपनियों ने दावा किया है कि निर्धारित प्रक्रिया के तहत 15 दिनों के भीतर क्षतिपूर्ति की राशि किसानों के बैंक खातों में जमा कराई जाएगी। इसके लिए कृषि रक्षक पोर्टल अथवा हेल्पलाइन पर शिकायत मिलने के 48 घंटे के भीतर सर्वेयर नियुक्त करने, 10 दिनों में खेतों का सर्वे पूरा करने और 15 दिनों के भीतर दावा राशि का भुगतान करने की प्रक्रिया निर्धारित की गई है।

          किसान संघ ने की कृषि ऋण माफी की मांग

          तूफान से प्रभावित किसानों को राहत देने के लिए किसान संगठनों ने भी सरकार से तत्काल कदम उठाने की मांग की है। प्रदेश किसान संघ छत्तीसगढ़ के मोतीलाल सिन्हा ने कहा कि प्रभावित किसानों के खेतों का तत्काल सर्वे कराया जाए और फसल क्षति का निष्पक्ष आकलन कर उचित मुआवजा दिया जाए। उन्होंने प्राकृतिक आपदा से आर्थिक संकट में आए किसानों का संपूर्ण कृषि ऋण माफ करने की मांग भी उठाई है बीमा कंपनियों को मिली शिकायतों में से 7,507 मामलों को निरस्त किया गया है, जबकि 1,197 मामलों में कार्रवाई की जा चुकी है। वहीं, 50 हजार से अधिक प्रकरण अभी लंबित हैं। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार 88 मामलों में सर्वेक्षण पूरा हो चुका है और 1,109 मामले सर्वेक्षण की प्रक्रिया में दर्ज हैं।

          कबीरधाम जिला सबसे ज्यादा प्रभावित

          फसल नुकसान की सूचना देने वाले किसानों की संख्या के लिहाज से कबीरधाम जिला सबसे आगे है। यहां 23,809 किसानों ने फसल क्षति की जानकारी दर्ज कराई है। इसके बाद बालोद में 7,237, दुर्ग में 4,897, खैरागढ़-छुईखदान-गंडई में 4,223, बेमेतरा में 3,671, धमतरी में 3,141 और राजनांदगांव में 3,026 किसानों ने शिकायत की है। इसके अलावा कांकेर में 879, सक्ती में 374, सारंगढ़-बिलाईगढ़ में 354, जांजगीर-चांपा में 188 और गरियाबंद में 115 किसानों ने फसल नुकसान की सूचना दी है। प्रदेश के अन्य जिलों से भी लगातार शिकायतें सामने आ रही हैं।

          तीन बीमा कंपनियों के पास पहुंचे हजारों मामले

          बीमा कंपनियों के आंकड़ों के अनुसार बजाज कंपनी के अंतर्गत आने वाले जिलों से 30,058 किसानों ने फसल नुकसान की सूचना दी है। वहीं एचडीएफसी कंपनी के पास 17,176 और एआईसी कंपनी के पास 12,432 शिकायतें दर्ज हुई हैं। प्राकृतिक आपदा की मार झेल रहे किसानों को राहत दिलाने के लिए शासन और बीमा कंपनियों के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती समय पर सर्वेक्षण पूरा कर पात्र किसानों को क्षतिपूर्ति उपलब्ध कराना है। किसानों को सलाह दी गई है कि वे फसल नुकसान की सूचना टोल फ्री नंबर 14447 पर दर्ज कराएं, ताकि उनके दावे पर समय रहते कार्रवाई हो सके।

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