मल्टीट्रैकिंग रेल परियोजनाओं से मजबूत होगा छत्तीसगढ़ का रेल नेटवर्क : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

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      • बिलासपुर-पेंड्रा रोड तीसरी और कटनी-पेंड्रा रोड चौथी लाइन को मंजूरी, यात्री सुविधाओं के साथ उद्योग-व्यापार को मिलेगा फायदा

      रायपुर (AkhandBharatHNKP.Com)। छत्तीसगढ़ में रेल सुविधाओं के विस्तार की दिशा में केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने करीब 10 हजार 783 करोड़ रुपए की लागत वाली तीन महत्वपूर्ण मल्टीट्रैकिंग रेल परियोजनाओं को मंजूरी दी है। इनमें बिलासपुर (उसलापुर)-पेंड्रा रोड तीसरी रेल लाइन और कटनी-पेंड्रा रोड चौथी रेल लाइन प्रदेश के लिए विशेष महत्व रखती हैं।

          https://dprcg.gov.in/post/1788969642/रायपुर-विकसित-छत्तीसगढ़-के-संकल्प-को-नई-गति-देंगी-मल्टीट्रैकिंग-रेल-परियोजनाएं-मुख्यमंत्री-श्री-विष्णु-देव-साय

          मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इन परियोजनाओं की मंजूरी का स्वागत करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव के प्रति आभार जताया। उन्होंने कहा कि नई रेल परियोजनाएं विकसित छत्तीसगढ़ के संकल्प को नई गति देंगी। इससे प्रदेश के रेल नेटवर्क की क्षमता बढऩे के साथ यात्री सुविधाओं, उद्योग, व्यापार और माल परिवहन को भी मजबूती मिलेगी। बिलासपुर (उसलापुर)-पेंड्रा रोड के बीच तीसरी रेल लाइन और कटनी-पेंड्रा रोड के बीच चौथी लाइन बनने से इस महत्वपूर्ण रेल गलियारे पर ट्रेनों के संचालन की क्षमता बढ़ेगी। अतिरिक्त रेल लाइन उपलब्ध होने से यात्री और मालगाडिय़ों की आवाजाही अधिक सुगम होगी तथा रेल यातायात के दबाव को कम करने में मदद मिलेगी। इससे छत्तीसगढ़ की देश के अन्य हिस्सों से रेल कनेक्टिविटी भी मजबूत होगी। परियोजना का लाभ आम यात्रियों के साथ प्रदेश के औद्योगिक और व्यापारिक क्षेत्र को भी मिलने की उम्मीद है।

          14 जिलों को मिलेगा सीधा लाभ

          केंद्रीय मंत्रिमंडल से स्वीकृत तीनों परियोजनाओं में खडग़पुर-झारसुगुड़ा (बागदेही) चौथी लाइन, कटनी-पेंड्रा रोड चौथी लाइन और बिलासपुर (उसलापुर)-पेंड्रा रोड तीसरी लाइन शामिल हैं। इनकी कुल लागत 10,783 करोड़ रुपए आंकी गई है और इन्हें वर्ष 2029-30 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। इन परियोजनाओं से पश्चिम बंगाल, झारखंड, ओडिशा, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के कुल 14 जिलों में रेल संपर्क मजबूत होगा। इससे रेलवे के मौजूदा नेटवर्क में करीब 656 किलोमीटर की बढ़ोतरी होगी। लगभग 4,790 गांवों और 56 लाख लोगों को बेहतर रेल कनेक्टिविटी का लाभ मिलने का अनुमान है।

          उद्योग और माल परिवहन को मिलेगी रफ्तार

          छत्तीसगढ़ खनिज और औद्योगिक संसाधनों से समृद्ध राज्य है। ऐसे में रेल नेटवर्क की क्षमता बढऩे से कोयला, सीमेंट, लोहा और इस्पात सहित अन्य वस्तुओं के परिवहन में तेजी आएगी। तीनों परियोजनाओं से हर साल करीब 2.7 करोड़ टन अतिरिक्त माल ढुलाई क्षमता विकसित होने का अनुमान है। बेहतर माल परिवहन सुविधा से उद्योगों की लॉजिस्टिक्स व्यवस्था मजबूत होगी। इससे निवेश, व्यापार और रोजगार के नए अवसर पैदा होने की संभावना है।

          पर्यटन और धार्मिक स्थलों की कनेक्टिविटी होगी बेहतर

          नई रेल परियोजनाओं का फायदा पर्यटन और धार्मिक स्थलों को भी मिलने की उम्मीद है। अचानकमार टाइगर रिजर्व, मल्हार का पुरातात्विक स्थल, रतनपुर स्थित मां महामाया मंदिर और खुटाघाट बांध जैसे प्रमुख स्थलों तक पहुंच आसान होगी। बेहतर रेल संपर्क से पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा मिलने के साथ स्थानीय कारोबार और रोजगार को भी गति मिल सकती है।

          पर्यावरण के लिहाज से भी महत्वपूर्ण

          परियोजनाओं को प्रधानमंत्री गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के अनुरूप विकसित किया जा रहा है। इसका उद्देश्य यात्री और माल परिवहन को अधिक सुगम बनाने के साथ लॉजिस्टिक्स व्यवस्था को मजबूत करना है। रेल परिवहन को पर्यावरण के अनुकूल साधन माना जाता है। इन परियोजनाओं से करीब 12 करोड़ लीटर तेल आयात की बचत और लगभग 62 करोड़ किलोग्राम कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में कमी आने का अनुमान है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि मजबूत रेल अधोसंरचना प्रदेश के समग्र विकास की महत्वपूर्ण आधारशिला है। नई परियोजनाएं छत्तीसगढ़ में बेहतर कनेक्टिविटी, सुगम आवागमन और औद्योगिक विकास को गति देने में अहम भूमिका निभाएंगी।

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