बिलासपुर (AkhandBharatHNKP.Com)। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने अनुकंपा नियुक्ति को लेकर अहम फैसला सुनाते हुए कहा है कि यह कोई उपहार या विरासत में मिली संपत्ति नहीं, बल्कि मृत कर्मचारी के पूरे परिवार को आर्थिक संकट से उबारने के लिए दी जाने वाली सहायता है।
हाईकोर्ट ने मामले में बहू को चेतावनी दी कि यदि वह अपनी आश्रित सास का भरण-पोषण नहीं करती है, तो उसकी नौकरी रद्द की जा सकती है। मामला अंबिकापुर निवासी ज्ञांती तिवारी से जुड़ा है। उनके पति घनश्याम तिवारी पुलिस विभाग में कॉन्स्टेबल थे, जिनकी वर्ष 2001 में मौत हो गई थी। इसके बाद बेटे अविनाश तिवारी को अनुकंपा नियुक्ति मिली। बाद में बेटे की भी मृत्यु हो गई, जिसके बाद उसकी पत्नी नेहा तिवारी को नौकरी दी गई। याचिका में आरोप लगाया गया कि नौकरी मिलने के बाद बहू का व्यवहार बदल गया और उसने सास की देखभाल व भरण-पोषण से इनकार कर दिया। परेशान होकर वृद्ध महिला ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की।
समाप्त की जा सकती सेवा
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि बहू ने नियुक्ति के समय शपथ-पत्र दिया था कि वह सास की देखभाल करेगी। ऐसे में नौकरी मिलने के बाद वह अपनी जिम्मेदारियों से पीछे नहीं हट सकती। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अनुकंपा नियुक्ति मृतक कर्मचारी के परिवार की सुरक्षा के लिए दी जाती है। यदि नियुक्त व्यक्ति अपने आश्रितों के पालन-पोषण के वादे से मुकरता है, तो उसकी सेवा समाप्त की जा सकती है।

